स्पेक्ट्रम अभी नहीं हुए अलॉट, Starlink और Amazon Kuiper ने कर ली साझेदारी

अभी सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटित हुआ नहीं है लेकिन इससे जुड़ी सर्विसेज ऑफर करने के लिए कंपनियों के बीच आपसी समझौते शुरू हो गए हैं। अमेरिका की दिग्गज सैटेलाइट कंपनियों स्टारलिंक (Starlink) और एमेजॉन कूपर (Amazon Kuiper) ने भारत में VSAT प्लेयर्स के साथ पहली कॉमर्शियल डील्स कर ली है। जानिए क्या होगा इन साझेदारी से और किस मॉडल पर काम करेंगी और सैटेलाइट सेगमेंट में अभी क्या स्थिति है?

अपडेटेड Jun 30, 2025 पर 1:55 PM
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अमेरिका की दिग्गज सैटेलाइट कंपनियों स्टारलिंक (Starlink) और एमेजॉन कूपर (Amazon Kuiper) ने भारत में VSAT प्लेयर्स के साथ पहली कॉमर्शियल डील्स कर ली है। (File Photo- Pexels)

अमेरिका की दिग्गज सैटेलाइट कंपनियों स्टारलिंक (Starlink) और एमेजॉन कूपर (Amazon Kuiper) ने भारत में VSAT प्लेयर्स के साथ पहली कॉमर्शियल डील्स कर ली है। यह भारत में एंटरप्राइज और गवर्नमेंट सैटेलाइट ब्रॉडबैंज सर्विसेज के लॉन्च होने की दिशा में एक अहम कदम है। खास बात ये है कि ये डील्स आधिकारिक रूप से सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के आवंटित होने से पहले हुई हैं। इन डील्स के बारे में मनीकंट्रोल को सूत्रों के जरिए पता चला है। VSAT (वेरी स्मॉल एपेर्चर टर्मिनल) एक सैटेलाइट कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी है जो डेटा, वॉयस और वीडियो सिग्नल को ट्रांसमिट और रिसीव करने के लिए छोटी सैटेलाइट डिशेज का इस्तेमाल करती है। वीसैट सर्विसेज देने वाली कंपनियां बैंक ब्रांचेज, एटीएम, रिमोट गैस स्टेशंस, वेयरहाउसेज, रिटेल चेन्स, सेलुलर बैकहॉल, मैरिटाइम और इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी और डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर की कनेक्टिविटी देती है जिन्हें हाई-बैंडविड्थ वाली LEO से काफी फायदा मिलेगा।

क्या होगा इन साझेदारी से?

साझेदारियों के जरिए लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट ब्रॉडबैंड कंपनियों का लक्ष्य बी2बी (एंटरप्राइज) और बी2जी (गवर्नमेंट) सेगमेंट में अपनी सर्विसेज को मोनेटाइज करना है। वहीं दूसरी तरफ उनका लक्ष्य वे रिटेल कंज्यूमर मार्केट के लिए भी तैयारी कर रही हैं, जिसमें प्राइस मॉडल पर अभी फैसला लिया जाना बाकी है। एक सूत्र ने कहा कि दोनों कंपनियां- स्टारलिंक और एमेजॉन कूपर भारतीय क्षमता का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहती है। इन्होंने जिन वीसैट कंपनियों के साथ साझेदारी की हैं, उनमें हग्स कम्युनिकेशंस (Hughes Communications), नेल्को (Nelco), और इनमारसैट (Inmarsat) शामिल हैं।


इस मॉडल पर काम करेंगी Starlink और Amazon Kuiper

स्टारलिंक और एमेजॉन कूपर की निगाहें एंटरप्राइज और रिटेल, दोनों सेगमेंट्स पर हैं और इनकी सीधी भिड़त Eutelsat OneWeb से होगी जो भारतीय सहयोगियों के जरिए सेल-थ्रू मॉडल अपनाएगी। एक सूत्र ने बताया कि स्टारलिंक और एमेजॉन कूपर भारत में हाइब्रिड गो-टू-मार्केट मॉडल अपना रही हैं। वे सीधे सर्विसेज देंगी और पार्टनरशिप्स के जरिए भी सर्विसेज देने के लिए साझेदारियां बना रही हैं। जैसे स्टारलिंक ने पहले ही रिलायंस जियो और एयरटेल के साथ साझेदारी का ऐलान कर दिया है जो सेल-थ्रू मॉडल है। एक सूत्र ने कहा कि जल्द ही ये अपने वेबसाइट के जरिए सीधे कंज्यूमर को भी कनेक्शन देना चालू करेंगी।

कैसी है मौजूदा स्थिति?

स्टारलिंक को भारत में GMPCS (ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशंस बाय सैटेलाइट) लाइसेंस पिछले महीने ही मिल गया था और इस प्रकार Eutelsat OneWeb और Jio Satellite के अलावा भारत में कॉमर्शियल सैटकॉम सर्विसेज देने की मंजूरी हासिल करने वाली तीसरी कंपनी बन गई। हालांकि अभी इसकी इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (IN-SPACe) से मंजूरी अटकी पड़ी है लेकिन सूत्रों के मुताबिक इंडियन स्पेस रेगुलेटर जल्द ही इस पर साइन करने वाला है। वहीं एमेजॉन कूपर को दोनों मंजूरी का इंतजार है। इसके अलावा डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) स्पेक्ट्रम आवंटन के नियम और प्राइसिंग मॉडल को अंतिम रूप देने पर काम कर रहा है जो टेलीकॉम अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) की सिफारिशों पर आधारित है।

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