फिनटेक स्टार्टअप भारतपे (BharatPe) ने अपने पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर (Ashneer Grover) के पास मौजूद कंपनी के शेयर और फाउंडर (संस्थापक) के दर्जे को वापस लेने के लिए सिंगापुर स्थित अंतरराष्ट्रीय ऑर्बिट्रेशन सेंटर (Singapore International Arbitration Centre) में याचिका लगाई है। ये शेयर अभी प्रतिबंधित कैटेगरी में हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। सूत्रों ने बताया कि BharatPe ने गुरुवार 8 दिसंबर को एक दिन पहले सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (SIAC) के नियमों के तहत यह मध्यस्थता याचिका लगाई है। अगर BharatPe की यह याचिका स्वीकार कर ली जाती है तो अशनीर ग्रोवर अपने पास मौजूद कंपनी के प्रतिबंधित शेयर और संस्थापक का दर्जा दोनों गंवा सकते हैं।
अशनीर ग्रोवर के पास अभी BharatPe की करीब 8.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है, लेकिन इसमें से 1.4% हिस्सेदारी प्रतिबंधित कैटेगरी में हैं। प्रतिबंधित शेयरों का मतलब है कि कंपनी के कर्मचारी के तौर पर मिली उस हिस्सेदारी को किसी को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता या बेचा नहीं जा सकता है।
सूत्रों ने कहा कि BharatPe की तरफ से Ashneer Grover को पहले एक कानूनी नोटिस भेजकर इन शेयर वापस करने को कहा गया था। हालांकि उन्होंने इन शेयरों को नहीं लौटाया। शेयरधारक के साथ हुए समझौते के तहत प्रतिबंधित शेयरों को वापस लेने का भी प्रावधान होता है। हालांकि इस मध्यस्थता याचिका के बारे में कंपनी की तरफ से अभी कोई आधारिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
BharatPe ने इस साल की शुरुआत में अशनीर ग्रोवर पर कंपनी के पैसों में हेराफेरी करने और धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे। लंबे विवाद के बाद अशनीर ग्रोवर ने कंपनी से इस्तीफा दे दिया और कुछ समय बाद उनकी कंपनी माधुरी जैन को कंपनी से निकाल दिया गया, जो BharatPe की कंट्रोल हेड थीं। हालांकि इसके बाद भी दोनों पक्षों के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा।
इस बीच BharatPe ने 7 सितंबर को ग्रोवर दंपत्ति और उनके उनके तीन रिश्तेदारों के खिलाफ कंपनी के पैसों के साथ हेरफेर करने के आरोप में दिल्ली हाई कोर्ट में एक दीवानी मुकदमा दायर किया है और उनसे करीब 88 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। साथ ही उसने दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा के पास भी इन तीनों के खिलाफ करीब 17 मामलों में शिकायत दर्ज कराई है।