ऑनलाइन ब्रोकिंग फर्म जीरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर नितिन कामत (Nithin Kamath) ने हाल ही में स्टार्टअप में कॉरपोरेट गवर्नेंस के मुद्दों को लेकर राय रखी है। कामत ने कहा कि स्टार्टअप में कॉरपोरेट गवर्नेंस के मुद्दों को लेकर सिर्फ फाउंडर को ही नहीं, बल्कि वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम को भी बराबर जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने 28 जून को कई सिलसिलेवार ट्वीटर कर भारतीय स्टार्टअप्स में कॉरपोरेट गवर्नेंस के मुख्य कारण को लेकर बात की। जीरोधा के फाउंडर ने कहा, "भारत में एक लचीला कारोबार बनाने में समय लगता है और ऐसा करने वाले लोगों की संख्या बहुत अधिक नहीं है।"
उन्होंने कहा, "भारतीय स्टार्टअप्स में कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मामले समय के साथ और अधिक बढेंगे। इसके लिए लोग फाउंडरों को दोषी ठहराएंगे, लेकिन हकीकत में वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम भी उतना ही दोषी है। इसका मूल कारण फाउंडरों और वेंचर कैपिटल की ओर से भारतीय बाजारों के साइज को अधिक आकलन लगाना है।”
कामत ने कहा, "भारत एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और उम्मीद है कि भविष्य में यह एक आर्थिक महाशक्ति होगी, लेकिन यह आज ऐसा नहीं है। देश में स्टार्टअप इकोसिस्टम के वैल्यूएशन को उचित ठहराने के लिए राजस्व के हिसाब से टारगेट मार्केट के साइज में भारी बढ़ोतरी की जरूरत है।"
बता दें कि नितिन कामत अपने फंड रैनमैटर कैपिटल के जरिए फिनटेक स्टार्टअप्स में निवेश भी करते हैं। उन्होंने बताया कि अधिकतर वेंचर कैपिटलिस्ट ने भारतीय बाजार के आकार की गलत गणना की है और इसे अपने लिमिटेड पार्टनर्स (एलपी) को बेच दिया है। “मुझे लगता है कि अधिकतर VCs ने इसकी गलत गणना की है और हो सकता है कि उन्होंने इसे अधिक बढ़ा-चढ़ाकर बेच दिया हो।"
कामत ने कहा कि हमारे जैसे छोटे मार्केट में मर्जर एंड एक्विजिशन के सीमित मौके हैं। ऐसे में 7 साल के भीतर बड़े एग्जिट (जहां निवेशक अपने निवेश को बेचकर कंपनी से निकल जाते हैं) काफी मुश्किल है। उन्होंने आगे कहा कि भारत के लिए फंडिंग की अवधि आमतौर पर 7 सालों से अधिक का होना चाहिए।