भारत के एडटेक स्टार्टअप Byju’s के लेंडर्स ने Byju’s Alpha के नियंत्रण को लेकर Byju’s के साथ अमेरिका में चल रहा एक केस जीत लिया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अदालत ने फैसला दिया है कि Byju’s Alpha का नियंत्रण अपने हाथ में लेते हुए Byju’s के लेंडर्स ने 1.2 अरब डॉलर के लोन पर स्टार्टअप की ओर से डिफॉल्ट का सही तरीके से हवाला दिया था। इन लेंडर्स में रेडवुड इन्वेस्टमेंट्स एलएलसी और सिल्वर पॉइंट कैपिटल एलपी शामिल हैं। डेलावेयर चांसरी कोर्ट जज मॉर्गन जर्न ने फैसला दिया कि Byju’s के फाउंडर बायजू रवीन्द्रन के एक रिश्तेदार को Byju’s Alpha के बोर्ड में लेंडर्स के नॉमिनी से रिप्लेस करने के लिए लेंडर्स के पास कॉन्ट्रैक्चुअल राइट्स थे।
Byju’s Alpha एक स्पेशल पर्पस कंपनी है, जिसे फाइनेंसिंग उद्देश्यों के लिए क्रिएट किया गया है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, जर्न ने Byju’s की उस शिकायत को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि Byju’s Alpha की देखरेख के लिए लेंडर्स की ओर से चुने गए टिमोथी पोहल को बागडोर संभालने के लिए अनुचित रूप से अधिकृत किया गया था। जज ने फैसले में कहा कि कंपनी के डिफॉल्ट्स के कारण पोहल को Byju’s Alpha के एकमात्र निदेशक के रूप में प्रभावी ढंग से बैठाया गया। Byju’s Alpha के एकमात्र निदेशक के रूप में नियुक्त होने के बाद पोहल ने कंपनी के सभी अधिकारियों को हटा दिया और सीईओ का पद संभाला।
ऑनलाइन एजुकेशन में महामारी के दौर की तेजी खत्म होने के बाद Byju’s के बढ़ते संकट के बीच लेंडर्स लोन के तौर पर दिए गए अपने 1.2 अरब डॉलर कंपनी से वापस पाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। जब सरकारी जांचकर्ताओं ने इस साल कंपनी के ऑफिसेज की तलाशी ली तो Byju’s एसेट्स बेचने और लोन इश्यू से निपटने के लिए काम कर रही थी। जब कंपनी की एक यूनिट लोन गारंटर के रूप में भारत सरकार का सपोर्ट पाने में विफल रही, तो लेंडर्स ने मार्च में डिफॉल्ट का नोटिस दायर किया। मामले में Byju’s का तर्क था कि उसके द्वारा बार-बार डिफॉल्ट के लेंडर्स के तर्क बेबुनियाद हैं।
कोर्ट ने अपने 2 नवंबर के फैसले में कहा कि लोन की शर्तों के अनुरूप अगर कोई डिफॉल्ट ट्रिगर होता है तो लेंडर्स के पास गिरवी रखे गए Byju’s Alpha शेयरों पर नियंत्रण लेने का अधिकार है। लोन पर Byju’s के खिलाफ मुकदमा ग्लास ट्रस्ट कंपनी द्वारा दायर किया गया था, जो लेंडर्स के लिए ट्रस्टी के रूप में कार्य करता है। लेंडर्स के साथ लड़ाई ने कुछ निवेशकों को Byju’s में अपनी हिस्सेदारी कम करने को प्रेरित किया है।