Byju's News: दिग्गज एडुटेक कंपनी बायजूज (Byju's) का मामला अभी सीरियस फ्रॉड इनवेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) के पास नहीं पहुंचा है। यह जानकारी मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (MCA) के सूत्रों ने दी है। जानकारी के मुताबिक बायजूज से जुड़े मामले की जांच अभी भी मिनिस्ट्री ही कर रही है। बायजूज में अनियमितताएं हुई हैं और इसने नियमों का भी पालन नहीं किया है, इस आरोपों की जांच जब मिनिस्ट्री पूरी कर लेगी, उसके बाद यह फैसला लिया जाएगा कि SFIO इस मामले में जांच करेगी या नहीं। SFIO मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स की एक मल्टीडिसप्लनेरी बॉडी है।
मिनिस्ट्री की जांच से भी कंपनी का इनकार
पिछले महीने मिनिस्ट्री के सूत्रों ने सीएनबीसी-टीवी18 को जानकारी दी थी कि बायजूज से जुड़े मामलों की जांच को लेकर मिनिस्ट्री ने आदेश दे दिया है। हालांकि एडुटेक कंपनी ने इस प्रकार की किसी जांच से इनकार किया था। बायजूज के प्रवक्ता ने 23 जून को कहा था कि मिनिस्ट्री बायजूज से जुड़े किसी मामले की जांच कर रही, इसे लेकर कंपनी को कोई जानकारी नहीं है और उसे मिनिस्ट्री से इस मामले में कोई बातचीत भी नहीं हुई है।
टर्म लोन को लेकर Byju’s ने फिर शुरू की बातचीत
इन सबके बीच बायजूज ने 4 जुलाई को जानकारी दी कि इसके प्रमोटर्स ने शेयरों की सेकंडरी सेल के जरिए जो पैसे जुटाए, उस पूरे पैसे को फिर से कंपनी में लगा दिया है। प्राइवेट मार्केट इंटेलिजेंस फर्म प्राइवेटसर्कल रिसर्च के मुताबिक प्रमोटर्स बायजू रवीन्द्रन, दिव्या गोकुलनाथ और रिजु रवीन्द्रन ने मिलकर 2015 से 40 सेकेंडरी ट्रांजैक्शंस में करीब 40.85 करोड़ डॉलर के शेयर बेचे हैं। प्राइवेटसर्कल के मुताबिक रवींद्रन के पास 15.90 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि दिव्या गोकुलनाथ के पास 3.32 फीसदी और रिजु रवींद्रन के पास 1.99 फीसदी हिस्सेदारी है।
इसके अलावा न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग ने हाल ही में जानकारी दी कि 120 करोड़ डॉलर के टर्म लोन की रीस्ट्रक्चरिंग के लिए बायजूज और इसके कुछ लेंडर्स के बीच बातचीत फिर से शुरू हो गई है। लेंडर्स ने विस्तार से एक प्रस्ताव तैयार किया है जिसमें कंपनी को अपना कर्ज नीचे लाने, कूपन बढ़ाने और लोन पर निवेशकों के हितों की सुरक्षा को कहा गया है।