'कंट्रीब्यूशन मार्जिन 1, 2, 3... ये सब बकवास, सच बोल दो', संजीव बिखचंदानी का नए जमाने की कंपनियों पर कटाक्ष

Nakuri.com के फाउंडर संजीव बिखचंदानी ने उन नए जमाने की टेक कंपनियों पर निशाना साधा है, जो अपने यूनिट इकोनॉमिक्स को बताने के लिए कई सारे पैमानों का इस्तेमाल करती हैं। बिखचंदानी ने कहा कि फाउंडरों को कॉरपोरेट गवर्नेंस के हित को देखते हुए साफ शब्दों में अपने मुनाफे के बारे में बात करनी चाहिए

अपडेटेड Feb 21, 2023 पर 6:58 PM
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संजीव बिखचंदानी, Nakuri.com के फाउंडर

Nakuri.com के फाउंडर संजीव बिखचंदानी ने उन नए जमाने की टेक कंपनियों पर निशाना साधा है, जो अपने यूनिट इकोनॉमिक्स को बताने के लिए कई सारे पैमानों का इस्तेमाल करती हैं। बिखचंदानी ने कहा कि फाउंडरों को कॉरपोरेट गवर्नेंस के हित को देखते हुए साफ शब्दों में अपने मुनाफे के बारे में बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "अगर कोई बुरी खबर है, तो फाउंडरों को उसे तुरंत दे देना चाहिए और यूनिट इकोनॉमिक्स को लेकर भ्रम नहीं फैलाना चाहिए। .....कंट्रीब्यूशन मार्जिन 1, कंट्रीब्यूशन मार्जिन 2, कंट्रीब्यूशन मार्जिन 3, ये सब बकवास बात हैं। सीधे-सीधे सच बोलो।"

बिखचंदानी ने कहा, "ईमानदार होना अच्छी बात है। कॉरपोरेट गवर्नेंस का शुरुआत और अंत दोनों फाउंडर के विचार के साथ होता है। आप चारों ओर हर तरह के जाल लगा सकते हैं। लेकिन एक दृढ़निश्चयी जालसाज फाउंडर इन सभी जाल को पार कर जाएगा, जैसा कि हम प्राइवेट और पब्लिक मार्केट में देख चुके हैं।"

जोमैटो (Zomato) और पॉलिसीबाजार (Policybazaar) जैसी नए जमाने की कंपनियों के निवेशक, बिखचंदानी ने स्टार्टअप्स इंडस्ट्री में फंडिंग की मौजूदा किल्लत के बारे में भी बात की और फाउंडरों को मुनाफे पर फोकस करने और लागत में कटौती करने की सलाह दी। यहां तक कि उन्होंने फाउंडरों को अपनी सैलरी में भारी कटौती करने की भी सलाह दी, जिससे वे जल्द मुनाफे में आ सकें।


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डिजिटल इंडिया समिट में बोलते हुए बिखचंदानी ने कहा कि उन्होंने जब 90 के दशक में जॉब पोर्टल नौकरी.कॉम की स्थापना की थी, तो उनके पास जल्द से जल्द मुनाफे में आने के अलावा कोई और चारा नहीं था।

उन्होंने कहा, "जब आपके पास कोई विकल्प नहीं होता है, तो बहुत सी चीजें अपनेआप संभव हो जाती हैं। हमने देश भर के अखबारों से नौकरियां निकालकर अपने वेबसाइट पर पोस्ट की। चूंकि प्लेटफॉर्म पर नौकरियां थीं, इसलिए साइट पर इंटरनेट ट्रैफिक आया। फिर हम बिजनेसों को भुगतान करने में सफल रहे।"

बिखचंदानी ने कहा, "शुरू में विजन नहीं, सेल्स टारगेट होता है। अगर सिर्फ विजन होगा, तो आप पैसे खो देंगे। अगर सेल्स टारगेट होगा तो फिर आप घाटे से बाहर आएंगे और पैसे बनाने लगेंगे।

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