देश की सबसे हाई-प्रोफाइल स्टार्टअप्स में से एक बायजूज (Byju’s) करीब 19 महीनों की देरी के बाद इस हफ्ते के अंत में अपने वित्त वर्ष 2022 के नतीजों को दाखिल कर सकती है। कंपनी ने सोमवार 16 अक्टूबर को जारी एक बयान में यह जानकार दी। Byju’s ने कहा कि उसकी सभी सब्सिडियरी कंपनियों का ऑडिट पूरा कर लिया है और उसे मंजूर कर लिया गया है। अब पैरेंट कंपनी थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड (Think and Learn Pvt Ltd) इस हफ्ते के आखिरी तक ग्रुप के कंसॉलिडिटेड नतीजों को मंजूरी दे सकती है। इससे पहले Byju’s के मैनेजमेंट ने निवेशकों से सितंबर महीने के अंत तक वित्त वर्ष 2022 के नतीजों को उनके सामने रखने पर सहमति जताई थी। साथ ही वित्त वर्ष 2023 के नतीजों को दिसंबर तक जमा करने को कहा था।
Byju’s के पास पिछले 2 सालों से कोई फुलटाइम चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नहीं था। कंपनी ने अपने वित्त वर्ष 2021 के नतीजों को भी 18 महीने की देरी से जमा किया था। कंपनी ने इस साल अप्रैल में वेदांता के पूर्व एग्जिक्यूटिव अजय गोयल को अपने CFO के तौर पर हायर किया था।
इससे पहले जून में बायजूज की लंबे समय से ऑडिटर रही डेलॉयट (Deloitte) ने वित्त वर्ष 2022 के नतीजों में देरी पर सवाल उठाते हुए इस्तीफा दे दिया था। इससे पहले डेलॉयट ने कंपनी के वित्त वर्ष 2021 के नतीजों में भी कंपनी के रेवेन्यू को पहचान करने वाले तरीकों पर सवाल उठाया था। डेलॉयट के इस्तीफे के बाद बायजूज ने BDO को अपने ऑडिटर के तौर पर हायर किया।
हालांकि FY22 के नतीजे कंपनी के 2 साल पहले की स्थिति को बताएंगे, लेकिन इसके बावजूद यह आंकड़े काफी अहम होंगे। FY22 कोरोना महामारी का दूसरा साल था और देश के एडटेक सेक्टर में इस दौरान काफी ग्रोथ दिखी थी। Byju's ने इस दौरान भारत और विदेश में कम से कम 8 प्रमुख एडटेक कंपनियों का अधिग्रहण किया और इक्विटी व डेट के जरिए करीब 3 अरब डॉलर जुटाए थे।
बायजूज ने 22 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर करीब 80 करोड़ डॉलर की फंडिंग राउंड को पूरा करके वित्त वर्ष 2022 का शानदार तरीके से अंत किया था। इसके साथ ही यह तब देश की सबसे अधिक वैल्यूएशन वाली स्टार्टअप बन हई थी। हालांकि इसके बाद से कंपनी को कई विवादों और मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।
इस सबकी शुरुआत हुई तब हुई, जब बायजूज के ऑडिटर डेलॉयट ने कंपनी के वित्त वर्ष 2021 के नतीजों पर साइन करने से इनकार कर दिया। इसके चलते कंपनी को अपने नतीजे दाखिल करने में करीब 18 महीने की देरी हुई। इसके बाद मीडिया के कंपनी के एजेट्स की ओर गलत तरीके बच्चों के माता-पिता को कोर्स बेचने और उन्हें लोन के जाल में फंसाने की तमाम खबरें आईं। कंपनी को भारत सरकार की विभिन्न एजेंसियों से जांच का भी सामना करना पड़ा। इसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) भी शामिल हैं।