चेन्नई मुख्यालय वाली फिनटेक स्टार्टअप पेशॉर्प (Paysharp) को पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में काम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। स्टार्टअप ने सोमवार 26 सितंबर को जारी एक बयान में यह जानकारी दी। Paysharp के को-फाउंडर और सीईओ कृष्ण कुमार मणि ने इस मौके पर कहा, "इससे हमें अपने मौजूदा प्रोडक्ट की क्षमताओं में सुधार करने और देश के लाखों SME और छोटे कारोबारियों के फाइनेंशियल ऑपरेशन को ऑटोमेट करने का नया नजरिया विकसित करने में मदद मिलेगी।"
कृष्ण कुमार मणि और सतीश एस ने साल 2019 में मिलकर Paysharp को शुरू किया था। यह एक B2B स्टार्टअप है, जो बिजनेसों को उनके सॉल्यूशएन या मोबाइल ऐप के साथ उनके एंटरप्राइज-ग्रेड के वर्चुअल खातों या UPI सिस्टम को जोड़ने का समाधान ऑफर करता है।
यह ब्रांडेड UPI हैंडल और कस्टमाइजेशन के साथ एक कंप्लीट कलेक्शन सॉल्यूशन ऑफर करता है, जिसमें मोबाइल इंटेंट, कलेक्शन रिक्वेस्ट और डायनेमिक क्यूआर कोड सहित UPI पेमेंट के सभी विकल्प मौजूद रहते हैं।
मणि ने बताया, "पेमेंट गेटवे सर्विस के अलावा यह बिलर्स को अपने प्लेटफॉर्म पर जोड़ने के लिए उन्हें BBPS (भारत बिल पेमेंट सर्विस) सॉल्यूशंस भी ऑफर करता है। Paysharp ने पेमेंट ट्रांसफर की कम कीमत की पेशकश करके अपना रास्ता बना लिया है जो B2B रिटेल मॉडल के लिए सबसे अच्छा काम करता है।"
इन्हें भी मिला पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस
इसके अलावा RBI ने बीते 21 दिसंबर को डिजिटल पेमेंट प्रोसेसिंग फर्म वर्ल्डलाइन ईपेमेंट्स इंडिया (Worldline ePayments India) को भी पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में सैद्धांतिक मंजूरी दी है। पिछले तीन महीनों में ओपन (Open), इंफीबीम (Infibeam) और कैशफ्री (Cashfree) सहित कई फिनटेक कंपनियों को भी पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस के लिए मंजूरी मिली है।
पेमेंट एग्रीगेटर का क्या काम होता है?
एक पेमेंट एग्रीगेटर का काम व्यापारियों और ई-कॉमर्स कंपनियों को पेमेंट सेवाएं मुहैया कराना होता। यह ग्राहकों से विभिन्न माध्यमों से फंड को स्वीकार करते हैं, उन्हें जमा करते हैं और एक निश्चित समय के बाद उन्हें व्यापारियों के खाते में ट्रांसफर कर देते हैं।