गूगल (Google) की आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस रिसर्च यूनिट, डीपमाइंड (DeepMind) के पूर्व रिसर्चर विशाल मैनी ने अपना नया वेंचर फंड बनाया है। इस फंड का नाम 'मिथोस वेंचर्स' रखा गया है। विशाल मैनी ने कहा कि उनका वेंचर फंड, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) पर काम करने वाले स्टार्टअप्स को बढ़ावा देगा। Vishal Maini ने पिछले साल मिथोस की स्थापना की थी और इस महीने दाखिल एक नियामकीय फाइलिंग के मुताबिक उन्होंने करीब 4 दर्जन निवेशकों से 1.4 करोड़ डॉलर जुटाए हैं।
इसके साथ ही विशाल मैनी Google के उन दर्जनों पूर्व कर्मचारियों की सूची में शामिल हो गए हैं, जो कंपनी से अलग होने के बाद एक एक उद्यमी और एक निवेशक या दोनों के रूप में AI तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहे हैं।
मैनी ने इस फंड को लेकर दिए अपने पहले इंटरव्यू में कहा, "मैं पहले अंतरिक्ष में खोज कार्यों, क्लाइट चेंज, मनुष्य की उम्र बढ़ाने वाले उत्पादों और हेल्थकेयर प्रोडक्ट आदि के बारे में सोच रहा था। हालांकि आखिर में आकर मैं वापस AI तकनीक पर आ गया क्योंकि यह इन सभी सेक्टर के लिए एक परिवर्तनकारी तकनीक है। "
उन्होंने कहा, "उन्होंने कहा कि हम जिस साइंस फिक्शन भविष्य के बारे में हमेशा सोचते थे, वह AI से ही संभव है। लेकिन मनुष्य हमेशा ड्राइविंग सीट पर रहेंगे।"
वेंचर्स इनवेस्टर्स और पब्लिक कंपनियों ने पिछले एक साल के दौरान AI स्टार्टअप्स में अरबों डॉलर का निवेश किया है। इससे जहां इस उभरती इंडस्ट्री को बढ़ावा मिला है। वहीं दूसरी ओर यह चिंता भी बढ़ गई है कि ये टेक्नोलॉजी बिना पर्याप्त निगरानी के विकसित हो रही है।
मैनी ने कहा कि डीपमाइंड में रहने के दौरान उनका फोकम हमेशा AI के सुरक्षित और नैतिक विकास पर था, जो एक निवेशक के तौर पर आगे भी बना रहेगा। मिथोस शुरुआती चरण के AI स्टार्टअप्स में निवेश करेगा। वह ऐसे स्टार्टअप की भी तलाश करेंगे जिनमें पुरानी अर्थव्यवस्थाओं को बदलने का वादा हो और AI के भविष्य के लिए दीर्घकालिक योजनाएं हों।