गेम्सक्रॉफ्ट टेक्नोलॉजी को बड़ी राहत, कर्नाटक HC ने रद्द किया ₹21,000 करोड़ का GST नोटिस

बेंगलुरु मुख्यालय वाली ऑनलाइन गेमिंग कंपनी गेम्सक्रॉफ्ट टेक्नोलॉजी (Gameskraft Technology) को बड़ी राहत मिली है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार 11 मई को कंपनी के खिलाफ जारी 21,000 करोड़ रुपये के जीएसटी नोटिस को रद्द कर दिया। नोटिस में कंपनी पर कथित रूप से 21,000 करोड़ रुपये के गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की चोरी का आरोप लगाया था

अपडेटेड May 11, 2023 पर 7:28 PM
GST अधिकारियों ने करीब 77,000 करोड़ रुपये की सट्टेबाजी की रकम पर 28% टैक्स लगाया था

बेंगलुरु मुख्यालय वाली ऑनलाइन गेमिंग कंपनी गेम्सक्रॉफ्ट टेक्नोलॉजी (Gameskraft Technology) को बड़ी राहत मिली है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार 11 मई को कंपनी के खिलाफ जारी 21,000 करोड़ रुपये के जीएसटी नोटिस को रद्द कर दिया। नोटिस में कंपनी पर कथित रूप से 21,000 करोड़ रुपये के गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की चोरी का आरोप लगाया था। इस आदेश का देश की पूरी स्किल गेमिंग सेक्टर पर प्रभाव दिखेगा, जो अभी जीएसटी नियमों में स्पष्टता का इंतजार कर रही है।

क्या है पूरा मामला?

GST इंटेलीजेंस यूनिट ने सितंबर 2022 में गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजी को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें कंपनी पर 21,000 करोड़ रुपये का जीएसटी नहीं चुकाने का आरोप लगाया गया था। यह जीएसटी के इतिहास में इस तरह का किया गया अबतक का सबसे बड़ा दावा था। यह नोटिस साल 2017 से 30 जून 2022 तक की अवधि के लिए था।

गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड (जीटीपीएल) पर रमी कल्चर, गेमजी और रम्मी टाइम जैसे कार्ड, कैजुअल और फैंटेसी गेम्स के जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया गया था। अधिकारियों ने आरोप लगाया कि गेम्सक्राफ्ट कथित तौर पर ग्राहकों को इनवॉइस नहीं जारी कर रहा था।


77,000 करोड़ की रकम पर लगाया टैक्स

जीएसटी अधिकारियों ने करीब 77,000 करोड़ रुपये की सट्टेबाजी की रकम पर 28 फीसदी टैक्स लगाया। अधिकारियों ने कहा, "कंपनी अपने प्लेयर्स/गेमर्स को ऑनलाइन कार्ड खेल में आने वाले नतीजों के आधार पर पैसे दांव लगाने की इजाजत देती थी और यह इस तरह यह सट्टेबाजी में लगी हुई थी।"

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उन्होंने आरोप लगाया कि गेमिंग प्लेटफॉर्म ने नकली/पिछली तारीख के इनवॉयस लगाए थे, जिसके बारे में दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच के दौरान पता चला। उन्होंने कहा कि कंपनी अपने ग्राहकों को सट्टा लगाने के लिए भी प्रेरित कर रही थी क्योंकि वॉलेट में पैसा जमा होने के बाद उसे वापस निकालने का कोई तरीका नहीं था।

हालांकि गेम्सक्रॉफ्ट ने तर्क दिया कि उसका प्रोडक्ट स्किल-आधारित गेमिंग एक्टिविटी में आता है, जो प्लेटफॉर्म फीस पर सिर्फ 18 फीसदी जीएसटी के दायरे में आता है। कंपनी ने कहा कि उसने नियमों के तहत खिलाड़ियों की ओर से दी गई एंट्री फीस में से 18% जीएसटी काटा है। यह एंट्री फीस आमतौर पर कॉन्टेस्ट में लगी पूरी रकम का करीब 5 से 15 फीसदी होता है। वही बाकी की रकम खिलाड़ियों के प्राइज पूल में चला जाता है।

हाई कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करते हुए गेम्सक्राफ्ट के ग्रुप जनरल काउंसलर जॉयज्योति मिश्रा ने कहा, "हम कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले से बहुत खुश हैं। यह हमारे बिजनेस मॉडल का पूरी तरह से समर्थन करता है। हमें सरकार और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और अब भी है। हमें उम्मीद है कि यह निर्णय जीएसटी अधिकारियों के साथ रचनात्मक बातचीत की राह बनाएगा और पूरी इंडस्ट्री के लिए प्रगतिशील GST नियमों का आधार बनेगा।"

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