Startups : एसएमई कंपनियों के लिए एक निओबैंकिंग प्लेटफॉर्म ओपन (Open) के इस हफ्ते की शुरुआत में भारत के 100वें यूनिकॉर्न (unicorn) के रूप में सामने आया है। ओपन ने एक अरब डॉलर की वैल्यूएशन पर 5 करोड़ डॉलर जुटाकर यह उपलब्धि हासिल की थी। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर स्टार्टअप फाउंडर्स, इनवेस्टर्स और सरकारी अधिकारियों ने खुशी जाहिर की थी।
ये 100 यूनिकॉर्न पूरे जोश के साथ ऊंची वैल्यूएशन पर फंड जुटा रही हैं, क्योंकि वे विभिन्न सेक्टर्स और क्षेत्र में पांव पसारने का इरादा रखती हैं। हालांकि, उनके लिए प्रॉफिटेबिलिटी एक बड़ा सवाल है और कुछ ही स्टार्टअप इस बाधा को पार करने में कामयाब रहे हैं।
डाटा एनालिटिक्स कंपनी ट्रैक्सन टेक्नोलॉजिस से मिले डाटा के मुताबिक, 100 में से सिर्फ 23 यूनिकॉर्न ही किसी एक वित्त वर्ष में प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने में कामयाब रहे हैं। एक अरब डॉलर से ज्यादा वैल्यूएशन वाले स्टार्टअप को यूनिकॉर्न कहा जाता है।
क्या इनवेस्टर्स को हुआ फायदा
डाटा से पता चलता है कि इन इनवेस्टर्स ने अभी तक 80 अरब डॉलर जुटाए और 300 अरब डॉलर से ज्यादा मार्केट वैल्यू खड़ी की।
यह डाटा खासा अहम है, क्योंकि बीते साल स्टॉक एक्सचेंजेस में लिस्ट हुए कुछ यूनिकॉर्न को कंपनी स्तर पर प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने में कामयाब नहीं होने पर इनवेस्टर्स की प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा था।
पेटीएम (Paytm) की पैरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस लि., पॉलिसीबाजार (Policybazaar) की पैरेंट कंपनी पीबी फिनटेक लि. और जोमैटो लि. (Zomato Ltd) अपने आईपीओ प्राइस से नीचे आ गए।
आईडीबीआई कैपिटल के हेड ऑफ रिसर्च ए के प्रभाकर ने कहा, “स्टॉक मार्केट इनवेस्टर्स विशेषकर रिटेल इनवेस्टर्स एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) जैसे इनवेस्टर्स हैं। वे 10 फीसदी रिटर्न से खुश रहते हैं, लेकिन 10 फीसदी बने रहना चाहिए। खुदरा इनवेस्टर्स रिस्क को नहीं समझते हैं। वे 100 फीसदी सफलता चाहते हैं। यदि वे 10 कंपनियों में निवेश करें तो वे सभी 10 कंपनियों को प्रॉफिटेबिल देखना चाहते हैं और सभी 10 उन्हें मल्टीबैगर रिटर्न दें।”
प्रभाकर ने कहा, पेटीएम जैसी कंपनियों द्वारा लिए गए प्रीमियम पर सवाल उठे तो उन्होंने कई चीजें ऑफर किए जाने की बात कही। हालांकि, घाटे वाली कंपनियों को इस तरह के कमेंट्स से फायदा नहीं मिलता। इससे भविष्य में होने वाली लिस्टिंग्स (न्यू एज टेक स्टार्टअप्स) पर असर पड़ेगा।
प्राइवेट मार्केट इनवेस्टर्स न्यू एज स्टार्टअप्स की प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर परेशान नहीं है और ऐसी कंपनियों पर वे बूलिश रहते हैं।
3वन4 कैपिटल (3one4 Capital) के फाउंडिंग पार्टनर सिद्धार्थ पई (Siddharth Pai) ने कहा कि इनवेस्टर्स और आंत्रप्रेन्योर्स को कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी की राह पर ध्यान देना चाहिए, न कि प्रॉफिटेबिलिटी पर। पई ने डार्विनबॉक्स और ओपन जैसी कंपनियों में निवेश कर रखा है।