यूनिकॉर्न का दर्जा पा चुकी ऑनलाइन ब्रोकिंग फर्म जीरोधा (Zerodha) के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) कैलाश नाद (Kailash Nadh) की अपनी एक अलग छवि है। बाकी यूनिकॉर्न कंपनियों के सीटीओ की तरह वह जीरोधा में सैंकड़ों सॉफ्टवेयर इंजीनियर की टीम की अगुआई नहीं करते हैं। इसके उलट उनके पास सिर्फ 30 कोडर्स की टीम है, जो पिछले कुछ सालों से ऐसी ही बनी हुई है। जब कंपनियां कुछ समय दोगुनी सैलरी पर आईटी जॉब्स के लिए हायर कर रही थी, तब भी नाद की टीम से न कोई जॉब छोड़कर नहीं गया और न ही इन्होंने किसी हायर किया। अब जब बाकी कंपनियां अपने यहां टेक जॉब की छंटनी करने में लगी हैं, तब भी नाद अपनी टीम के साथ बने हुए हैं।
इसके पास कारण है कि नाद किसी भी नए प्रोडक्ट या फीचर्स को लॉन्च करने में कोई जल्दबाजी नहीं करते हैं। जीरोधा की टीम किसी भी सॉफ्टवेयर को लॉन्च करने से पहले उसे बनाने और टेस्ट करने में अपना समय लेती है।
हाल ही में मनीकंट्रोल के साथ बातचीत में जब नाद से पूछा गया कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के आने से सॉफ्टवेयर जॉब्स खत्म हो जाएंगे। इस पर उन्होंने कहा कि यह वास्तव में इस बात पर निर्भर करता है कि हम किस प्रकार की सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के बारे में बात कर रहे हैं। नाद ने कहा, "अगर आप कोई अच्छा सिस्टम बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो बड़े स्तर पर जाए, तो मुझे नहीं लगता कि आज AI वहां सेंध लगा सकते हैं। हालांकि यह निचले स्तर के टेक जॉब पर काफी असर डाल सकता है, जहां किसी मौजूदा सिस्टम को बस मेंटन करने या उसमें थोड़ा सा बदलाव कर चलाने की बात है। यह भी ध्यान देने की जरूरत है कि टेक वर्ल्ड में अधिकतर जॉब इसी स्तर के हैं।"
नाद ने बताया कि वह खुद सॉफ्टवेयर डीबग करने के लिए ChatGPT का इस्तेमाल करने लगे हैं। उन्होंने कहा, "पहले मैं गूगल पर सर्च कर जबाव खोजता था और देखता था कि बाकी डेवलपर्स की इस पर क्या राय है। लेकिन अब ChatGPT के आने से मेरा हर डीबग पर करीब 30-45 मिनट बचा रहा है। अब, मुझे 5 सेकंड में उत्तर मिल जाता है। यानी एक व्यक्ति कई लोगों के काम अब कर सकता है। इसका सीधा सा मतलब है कि आपको असल में बहुत सारे लोगों की जरूरत नहीं है।"
बड़ी आईटी कंपनियों में लाखों की संख्या में सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स काम कर रहे हैं। क्या इनकी नौकरियां पर AI के चलते जल्द खतरा आ सकता है। यह पूछे जाने पर नाद ने कहा, "आईटी कंपनियां इतनी बड़ी संख्या में लोगों को टेक्नोलॉजी के चलते नहीं, बल्कि अपने बिजनेस मॉडल के चलते हायर करती है। ये कंपनियां दूसरे फर्मों को आईटी सेवाएं देती हैं। वह उन सेवाएं के लिए जितने लोगों को तैनात करती है, उसके आधार पर उन कंपनियों से बिल वसलूती है।"
नाद ने कहा, "हालांकि अगर आप इन सब चीजों को एक तरफ रख दें, तो निचले स्तर के IT जॉब्स के काम को जेनरेटिव्स आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (Generative AI) के जरिए आसानी आसानी से किया जा सकता है। इन नौकरियों में बहुत कम क्रिएटिविटी वाले काम शामिल होते हैं। इसमें आम तौर बड़े क्लाइंट्स के लिए पुराने सिस्टम के रखरखाव और पैचिंग काम होताहै। और तार्किक रूप से इन जॉब्स को AI से बदलना सबसे आसान काम है।"