बीते कुछ सालों में इनवेस्टमेंट की दुनिया में काफी बदलाव आया है। रिटेल इनवेस्टर्स काफी होशियार हो गए हैं। यह कहना है कि कोटक एएमसी (Kotak AMC) के एमडी नीलेश शाह का। उन्होंने कहा कि हमें रिटेल इवेस्टर्स को शुक्रिया कहना चाहिए। उन्होंने न सिर्फ हमें SIP के जरिए पैसे दिए हैं बल्कि एसेट एलोकेशन फंड्स और बैलेंस्ड एडवॉन्टेज फंड्स में भी इनवेस्टमेंट किया है। इस वजह से फॉरेन इवेस्टर्स की सेलिंग का असर मार्केट पर ज्यादा नहीं पड़ा है। म्यूचअल फंडों ने खरीदारी कर बजार को गिरने से बचा लिया है।
रिटेल इनवेस्टर्स ने दिखाई मैच्योरिटी
शाह ने कहा कि अक्टूबर 2021 से मार्च 2022 के बीच रिटेल इनवेस्टर्स ने खूब मैच्योरिटी दिखाई है। बाजार में गिरावट के बावजूद म्यूचुअल फंड्स इनवेस्टर्स पहले की तरह डरे हुए नहीं नजर आए। हर गिरावट पर घरेलू फंडों ने ज्यादा खरीदारी की है। उन्होंने कहा कि इनवेस्टर्स को मार्केट में गिरावट को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। लेकिन, सावधान रहने में कोई नुकसान नहीं है। इनवेस्टर्स को शेयरों में इनवेस्टमेंट जारी रखना चाहिए। इंडिया की लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी को ध्यान में रखना जरूरी है।
बदली है इनवेस्टमेंट की दुनिया
कोटक एएमसी के एमडी ने कहा कि पिछले 20 साल में काफी बदलाव आया है। पहले फॉरेन फंड्स खरीदारी करते थे और घरेलू म्यूचुअल फंड कंपनियां बिकवाली करती थीं। अब ऐसा नहीं है। फीसदी के रूप में जीडीपी में म्यूचुअस फंड्स की हिस्सेदारी बढ़ रही है। यह बहुत अच्छी बात है। मार्च 2020 के क्रैश के दौरान घरेलू इनवेस्टर्स ने हमें पैसे दिए ताकि हम फॉरेन फंड्स की सेलिंग में खरीदारी कर पाए।
रिटेल इनवेस्टर्स से आ रहा अच्छा निवेश
SIP के रास्ते हो रहे इनवेस्टमेंट के बारे में उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2021 से मार्च 2022 के दौरान रिटेल इनेवस्टर्स ने हमें काफी पैसे दिए। उन्होंने सिप के साथ ही एकमुश्त इनवेस्टमेंट भी किया। यही वजह है कि बैलेंस एडवॉन्टेज फंड का पैसा बढ़कर करीप 2 लाख करोड़ हो गया है। बैलेंस ए़डवॉन्टेज फंड में बाजार गिरने पर खरीदारी की जाती है और बाजार चढ़ने पर बिकवाली होती है।
हर महीने आ रहे 21,000 करोड़ रुपये
म्यूचुअल फंड मार्केट की तस्वीर बताते हुए शाह ने कहा कि हर महीने सिप के रास्ते करीब 11,000 करोड़ रुपये आ रहे हैं। लंपसम निवेश के रास्ते भी करीब 10,000 करोड़ रुपये का इनवेस्टमेंट हर महीने किया जा रहा है। इस तरह हर महीने हमारे पसा 21,000 करोड़ रुपये आ रहे हैं। इससे हम फॉरेन इनेवस्टर्स की बिकवाली का सामना करने में सक्षम हैं। यह पैसा आईपीओ में भी जा रहा है।