सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को वेदांता, वोडाफोन आइडिया और अदाणी एंटरप्राइजेज सहित 13 कंपनियों के खिलाफ 20,000 करोड़ से लेकर 23,000 करोड़ रुपये तक के DRI नोटिस को रिवाइव कर दिया। यह केंद्रीय वित्त मंत्रालय के लिए एक बड़ी जीत है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2021 के आदेश को पलट दिया है और माना है कि डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (DRI) के अधिकारियों के पास सीमा शुल्क की वसूली के लिए नोटिस जारी करने का अधिकार है।
इससे पहले साल 2021 में अदालत ने सीमा शुल्क बकाया की वसूली के लिए नोटिस जारी करने की DRI की पावर को छीन लिया था, जिसके कारण नोटिस रद्द कर दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2021 के फैसले में निष्कर्ष स्पष्ट रूप से गलत है।
फैसला 108 मामलों के एक बैच पर
यह भी कहा कि DRI अधिकारियों को केंद्र की ओर से उचित अधिकारियों के रूप में नोटिफाई किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने संभावित रूप से 800 मामलों में 20,000 करोड़ से लेकर 23000 करोड़ रुपये तक के DRI नोटिसेज को रिवाइव कर दिया है। कोर्ट का यह ताजा फैसला 108 मामलों के एक बैच पर आया है।
कौन सी हैं ये 13 कंपनियां
DRI नोटिस का सामना करने वाली कंपनियों में वेदांता, वोडाफोन आइडिया, अदाणी एंटरप्राइजेज, टीवीएस मोटर कंपनी, सैमसंग इंडिया, गोदरेज एंड बॉयस मैन्युफैक्चरिंग, BSNL, Daikin, सोनी इंडिया, कैनन, निकॉन इंडिया, सेन्हाइजर और याकुट डैनोन शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट के 2021 के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने एक रिव्यू पिटीशन दाखिल किया था। इसके बाद कोर्ट ने इस पिटीशन पर सुनवाई की और सितंबर 2024 में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया कि क्या सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत पावर डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस को प्रदान की जा सकती हैं।