देश में ईवी यानी इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अपनाने का दौर अब काफी आगे निकल चुका है। अब यह अर्ली एडॉप्टर्स के चरण से आगे निकल चुका है। इसे देखते हुए टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (Tata Motors PV) अब आम ग्राहकों तक ईवी की पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रही है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2030-31 तक 4 नए इलेक्ट्रिक मॉडल और 10 से अधिक फेसलिफ्ट एवं अपडेटेड मॉडल लॉन्च करने की योजना बनाई है। कंपनी ईवी मार्केट में अपनी लीडरशिप पोजिशन बनाए रखने के लिए लगातार काम कर रही है। अर्ली एडॉप्टर्स ऐसे ग्राहक होते हैं, जो किसी नए आइडिया या तकनीक को सबसे पहले अपनाते हैं।
क्या है Tata Motors PV का प्लान
इंवेस्टर प्रेजेंटेशन के मुताबिक टाटा मोटर्स पीवी की नजर वित्त वर्ष 2031 तक अपनी कुल बिक्री में 30% से अधिक हिस्सा ईवी का रखने का है। कंपनी का कहना है कि वित्त वर्ष 2031 तक उसके पास 10 ईवी नेमप्लेट्स का पोर्टफोलियो होगा और अगले कुछ वर्षों में लगातार नए मॉडल लॉन्च कर ईवी लाइनअप को कंपनी और मजबूत करेगी। अभी इसके ईवी पोर्टफोलियो में- Xpres-T, Curvv.ev, Harrier.ev, Nexon.ev, Punch.ev और Tiago.ev शामिल हैं। कंपनी की योजना इनके अलावा FY31 तक 4 नए EV मॉडल और 10 से अधिक फेसलिफ्ट व रिफ्रेश संस्करण लॉन्च करने की है। इंवेस्टर प्रेजेंटेशन के हिसाब से इसकी योजना में Sierra.ev, एविन्या (Avinya) कॉन्सेप्ट पर आधारित एक नया मॉडल और दो अन्य नए इलेक्ट्रिक वाहन लाने की है।
टाटा मोटर्स पैसेंजर वेईकल्स अपनी ईवी की रेंज को दो से तीन गुना और चार्जिंग की स्पीड को तीन गुना बढ़ाने के साथ-साथ बैटरी की एनर्जी डेंसिटी को 20-23% तक बढ़ाने पर भी काम कर रही है। कंपनी 75 kWh से ज्यादा पावर वाली थर्ड-जेनरेशन बैटरी पर विचार कर रही है, ताकि मौजूदा जेनरेशन के मुकाबले दो से तीन गुना ज्यादा रेंज, तीन गुना तेज चार्जिंग और 20-23% ज्यादा एनर्जी डेंसिटी मिल सके।
देश में ईवी मार्केट की नए चरण में एंट्री
टाटा मोटर्स पीवी ईवी सेगमेट की ग्रोथ के अगले चरण की तैयारी कर रही है। कंपनी के मुताबिक देश का ईवी मार्केट अब अर्ली एडॉप्टर्स से आगे बढ़कर अर्ली मेजॉरिटी के चरण में एंट्री कर चुका है, जो मार्केट के लिए बसे बड़ा और अहम ग्राहक वर्ग माना जाता है। कंपनी के मुताबिक अर्ली एडॉप्टर्स की ईवी मार्केट में 13.5% तो अर्ली मेजॉरिटी और लेट मेजॉरिटी की 34-34% हिस्सेदारी है जबकि लैगार्ड्स की 16%। इनोवेटर्स की महज 2.5% हिस्सेदारी ही है।'इनोवेटर्स' रिस्क लेने वाले होते हैं जिन्हें नई चीजें सबसे पहले आजमाना पसंद होता है, तो 'लैगार्ड्स' पारंपरिक सोच वाले होते हैं जो बदलाव का विरोध करते हैं और सबसे आखिर में नई चीजों को अपनाते हैं।