TCS के सीईओ ने कहा, सर्विसेज की डिमांड स्ट्रॉन्ग है, लेकिन हम ज्यादा सावधानी बरत रहे

टीसीएस की ग्रोथ में उत्तरी अमेरिकी बाजार का बड़ा हाथ रहा। यह साल दर साल आधार पर स्थिर करेंसी में 17.6 फीसदी बढ़ा है। इसके बाद यूरोप का स्थान है, जिसकी ग्रोथ 14.1 फीसदी रही है

अपडेटेड Oct 11, 2022 पर 10:38 AM
सितंबर तिमाही में टीसीएस को Marks & Spencer, Zurich Insurance, Nokia और Boots से बड़ी डील मिली।
     
     
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    Tata Consultancy Services (TCS) की ऑर्डरबुक सितंबर तिमाही के अंत में 8.1 अरब डॉलर थी। यह कंपनी के मैनेजमेंट के अनुमान के मुताबिक है। मैनेजमेंट ने ऑर्डरबुक हर तिमाही 7-9 अरब डॉलर रहने की उम्मीद जताई थी। जून तिमाही में कंपनी की ऑर्डरबुक 8.2 अरब डॉलर थी। पिछले साल सितंबर तिमाही में यह 7.6 अरब डॉलर थी।

    टीसीएस के सीईओ राजेश गोपीनाथ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हम ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं। माहौल खराब है। ऐसे में सावधान रहना बहुत जरूरी है। क्लाइंट्स के खर्च के बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें अगले साल के बजट के बारे में तीन से छह महीने बाद पता चलेगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि सर्विसेज की डिमांड मजबूत बनी हुई है।

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    गोपीनाथन ने कहा, "ऑर्डरबुक अच्छी बनी हुई है। हमने ग्रोथ और ट्रांसफॉर्मेशन इनिशिएटिव, क्लाउड माइग्रेशन और आउटसोर्सिंग इंगेजमेंट पर फोकस किया है। लेकिन, हमें आगे की अनिश्चितता को देखते हुए ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत दिख रही है।" उन्होंने कहा कि सितंबर तिमाही में कोई बहुत बड़ी डील नहीं हुई। पिछली तिमाही में 40 करोड़ डॉलर के प्राइस में कुछ डील मिली थीं। ये अलग-अलग सेक्टर की हैं।

    कंपनी के सीओओ NG Subramaniam ने कहा कि सभी ज्योग्राफीज और वर्टिकल्स में डिमांड अच्छी है। लेकिन, कुछ नरमी दिख रही है। खासकर लंबी अवधि डील में यह बात दिख रही है। यूरोप में लोग आने वाले विंटर को लेकर चिंता में हैं। उन्हें नहीं पता यह कैसा रहेगा। इसलिए थोड़ी नरमी की उम्मीद करना ठीक रहेगा।

    सितंबर तिमाही में टीसीएस को Marks & Spencer, Zurich Insurance, Nokia और Boots से बड़ी डील मिली। रिटेल और BFSI सहित टीसीएस के प्रमुख सेक्टर को अभी इनफ्लेशन और बढ़ते इंटरेस्ट रेट की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

    टीसीएस की ग्रोथ में उत्तरी अमेरिकी बाजार का बड़ा हाथ रहा। यह साल दर साल आधार पर स्थिर करेंसी में 17.6 फीसदी बढ़ा है। इसके बाद यूरोप का स्थान है, जिसकी ग्रोथ 14.1 फीसदी रही है। इंग्लैंड की ग्रोथ 14.8 फीसदी रही है। उभरते बाजारों में इंडियन मार्केट की ग्रोथ 16.7 फीसदी रही है। लैटिन अमेरिका की ग्रोथ 19 फीसदी, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका की ग्रथ 8.2 फीसदी रही। एशिया पैसेफिक की ग्रोथ 7 फीसदी रही।

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