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India-US Trade Deal: अमेरिकी वाइन होगी सस्ती, लेकिन भारतीय व्हिस्की अब भी हैं इस कारण मदमस्त

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच कारोबारी डील लगभग तय हो चुका है और दोनों देशों का ज्वाइंट स्टेटमेंट आ चुका है। इस डील से चलते अमेरिकी वाइन और अन्य स्पिरिट्स भारत में सस्ती हो सकती है लेकिन व्हिस्की की दिग्गज भारतीय कंपनियों पर इसका खास असर नहीं पड़ेगा। जानिए ऐसा क्यों?

Edited By: Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Feb 08, 2026 पर 1:17 PM
India-US Trade Deal: अमेरिकी वाइन होगी सस्ती, लेकिन भारतीय व्हिस्की अब भी हैं इस कारण मदमस्त
भारतीय व्हिस्की मार्केट में अमेरिकी व्हिस्की की हिस्सेदारी महज 0.1% ही है जिसका 9 लीटर बोटल के 2.29 लाख केस की बिक्री होती है। यहां भारतीय कंपनियों का ही दबदबा है। (File Photo- Pexels)

India-US Trade Deal: अमेरिकी वाइन और स्पिरिट्स के लिए अपना मार्केट खोलने के लिए भारत तैयार हो गया है। अमेरिका के साथ अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट के तहत अमेरिकी कंपनियों को इस बड़ी राहत पर हालांकि भारतीय व्हिस्की ब्रांड्स पर असर पड़ने की कोई आशंका नहीं दिख रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के दावे के मुताबिक भारत और अमेरिका के बीच के कारोबारी डील के चलते घरेलू स्पिरिट कंपनियों को मिनिमम इंपोर्ट प्राइस मैकेनिज्म से सपोर्ट मिलेगा जिसके तहत एल्कोहॉल बेवरेजेज को एक तय फ्लोर प्राइस से कम भाव पर बेचने की मंजूरी नहीं मिलेगी। इसके अलावा भारतीय व्हिस्की कंपनियां इसलिए भी बेफिक्र हो सकती है क्योंकि अमेरिका के व्हिस्की ब्रांड्स की भारतीय मार्केट में बहुत कम हिस्सेदारी है।

कीमतों का अधिक असर नहीं, यानी महंगी हो या सस्ती, जो अच्छी लगे बिकेगी वही

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय व्हिस्की मार्केट में अमेरिकी व्हिस्की की हिस्सेदारी महज 0.1% ही है जिसका 9 लीटर बोटल के 2.29 लाख केस की बिक्री होती है। यहां भारतीय कंपनियों का ही दबदबा है। इसके बाद 3% से थोड़ी अधिक हिस्सेदारी के साथ स्कॉच व्हिस्की का नंबर आता और फिर महज 0.2% हिस्सेदारी के साथ आयरिश व्हिस्की का। हालांकि ऐसा नहीं है कि बाहर से आने वाली व्हिस्की महंगी है तो इसका सेल्स पर असर पड़ा हो। ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के डायरेक्टर जनरल विनोद गिरी का कहना है कि अधिकतर बॉर्बन और टेनेसी व्हिस्की प्रीमियम व्हिस्की कंज्यूमर्स के बड़े वर्ग को अधिक आकर्षित नहीं करतीं। इसके अलावा कीमत भी ग्राहकों के लिए कोई बड़ा फैक्टर नहीं है क्योंकि इंडिया जिम बीम स्थानीय तौर पर बॉटल्ड स्कॉच व्हिस्की से कम कीमत पर बिकने के बावजूद कम बिकती है। ऐसे में उनका मानना है कि बॉर्बन की कीमतें गिरने से भारतीय मार्केट में अधिक असर पड़ने के आसार नहीं है।

वाइन मार्केट में जरूर ऑस्ट्रेलिया का है दबदबा

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