India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच कारोबारी डील, ये हैं 11 अहम बातें
India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच जिस कारोबारी सौदे का इंतजार किया जा रहा था, उसका मसौदा आखिर सामने आ गया। हालांकि ट्रेड एग्रीमेंट पर अभी साइन नहीं हुए हैं और इस पर साइन होने के बाद ही लागू होगा। यह इस एग्रीमेंट से जुड़ी 11 अहम बातें बिंदुवार करके दी जा रही है
India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते के तहत भारत ने अमेरिकी सामानों पर आयात शुल्क कम करने या पूरी तरह हटाने पर सहमति जताई है।
India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते के तहत भारत ने अमेरिकी सामानों पर आयात शुल्क कम करने या पूरी तरह हटाने पर सहमति जताई है। इसके तहत अमेरिका 50% के टैरिफ को घटाकर 18% करने पर हामी भरी है। हालांकि ध्यान दें कि 18% का नया टैरिफ एग्रीमेंट पर औपचारिक रूप से साइन होने के बाद ही लागू होगा। फिलहाल दोनों देशों ने केवल एक संयुक्त बयान जारी किया है, समझौते पर अभी हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। इस समझौते पर मार्च के मध्य तक औपचारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, जिसके बाद नई दरें प्रभावी हो जाएंगी।
India-US Trade Deal: ये हैं सौदे की 11 अहम बातें
भारत पर लगाए गए टैरिफ को अमेरिका पहले के 50% से घटाकर 18% करेग। इससे भारतीय निर्यातकों-खासतौर पर छोटे कारोबारियों, किसानों और मछुआरों-के लिए $30 ट्रिलियन यानी $30 लाख करोड़ के बाजार का दरवाजा खुलेगा। इसमें टेक्सटाइल्स और अपेरल, चमड़ा और फुटवियर, प्लास्टिक और रबर प्रोडक्ट्स, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प उत्पाद और कुछ मशीनरी शामिल हैं।
कई चीजों पर टैरिफ पूरी तरह जीरो कर दिया जाएगा, जैसे कि जेनेरिक दवाएं, जेम्स और डायमंड्स और विमानों के पुर्। भारत को सेक्शन 232 के तहत विमान पुर्जों पर छूट, ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ रेट कोटा और जेनेरिक फार्मा पर बातचीत के जरिए तय किए गए फायदे मिलेंगे।
भारत ने मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस जैसे संवेदनशील एग्री और डेयरी प्रोडक्ट्स को पूरी तरह सुरक्षित रखा है।
अमेरिका के सभी इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स के साथ-साथ कई फूड और एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स पर भारत टैरिफ खत्म करेगा या घटाएगा। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, पशुओं के लिए रेड सोरघम, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स समेत अन्य प्रोडक्ट शामिल हैं।
दोनों देश आपसी हित वाले क्षेत्रों में एक-दूसरे को प्रिफरेंशियल मार्केट एक्सेस देने को लेकर प्रतिबद्धता दिखाएंगे। इसके साथ ही, ओरिजिन के नियम (Rules of Origin) तय किए जाएंगे, ताकि समझौते का फायदा मुख्य रूप से भारत और अमेरिका को ही मिले।
अमेरिका के मेडिकल डिवाइस बिजनेस में लंबे समय से चली आ रही दिक्कतों को दूर करने पर भारत राजी हुआ है। साथ ही भारत अमेरिकी ICT (इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेश टेक्नोलॉजी) प्रोडक्ट्स को लेकर इंपोर्ट लाइसेंसिंग प्रोसीजर्स को समाप्त करेगा जिसके चलते इन्हें बाजार में पहुंचने में देरी होती है या इनकी लिमिट तय रहती है
दोनों में से कोई भी देश अगर टैरिफ में बदलाव करता है तो दूसरे देश को भी अपनी प्रतिबद्धताओं में बदलाव का हक होगा।
दोनों देश द्विपक्षीय कारोबारी समझौते के जरिए एक-दूसरे के मार्केट में मौके बढ़ाने पर काम करेंगे ताकि आर्थिक सुरक्षा को लेकर तालमेल मजबूत सके, सप्लाई चेन बेहतर हो सके और किसी तीसरे देश की बाजार-विरोधी नीतियों से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।
भारत का लक्ष्य पांच साल में अमेरिका से $50 हजार करोड़ के एनर्जी प्रोडक्ट्स, एयरक्राफ्ट और इसके पार्ट्स, प्रेशस मेटल्स, टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोल मंगाने का है।
भारत और अमेरिका के बीच GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स) के साथ-साथ डेटा सेंटर्स में इस्तेमाल होने वाले टेक प्रोडक्ट्स का कारोबार बढ़ेगा तो साथ ही ज्वाइंट टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन को बढ़ावा दिया जाएगा।
भारत और अमेरिका, दोनों ही डिजिटल ट्रेड के रास्ते की दिक्कतों को दूर करेंगे।