माइनिंग कंपनी वेदांता लिमिटेड (Vedanta Ltd.) ने अपने स्टील कारोबार को बेचने की योजना को रोक दिया है। इसकी वजह है कि 1 अरब डॉलर की शेयर ब्रिकी से कंपनी को अपने फाइनेंस में काफी राहत मिली है। इसके अलावा पर्यावरणीय और रेगुलेटरी चिंताओं ने संभावित बोलीदाताओं को रोक दिया है। यह बात ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वालों के हवाले से कही गई है।
सूत्रों के मुताबिक, अनिल अग्रवाल की वेदांता, समूह के ऋण भार को कम करने में मदद करने के लिए स्टील कारोबार की बिक्री से लगभग 2.5 अरब डॉलर जुटाने की कोशिश में थी। इसके लिए वह सलाहकारों के साथ काम कर रही थी। कंपनी के स्टील कारोबार में आयरन ओर और मैंगनीज माइन्स शामिल हैं।
जुलाई में QIP से जुटाए ₹8500 करोड़
पिछले महीने शेयर प्लेसमेंट के माध्यम से Vedanta के अरबों डॉलर के फंड जुटाने से ऋण दबाव में कुछ कमी आई है और कारोबार की बिक्री की जरूरत कम हो गई है। मामले की जानकारी रखने वालों का कहना है कि कंपनी बाद में बिक्री पर फिर से विचार कर सकती है। वेदांता लिमिटेड ने जुलाई 2024 में 19.31 करोड़ इक्विटी शेयरों के क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए 8,500 करोड़ रुपये (1 अरब डॉलर से अधिक) जुटाए। QIP के तहत इश्यू प्राइस 440 रुपये प्रति शेयर रहा। QIP में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs), म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियों और अन्य निवेशकों की ओर से अच्छी रुचि देखने को मिली।
Vedanta 2018 में उतरी थी स्टील कारोबार में
वेदांता ने 2018 में स्टील कारोबार में प्रवेश किया था। उस वक्त कंपनी ने ईएसएल स्टील लिमिटेड में 90% हिस्सेदारी खरीदी थी, जिसके ऑपरेशंस पूर्वी भारत के झारखंड राज्य के बोकारो में है। कंपनी की वेबसाइट से पता चलता है कि इसके प्रोडक्ट्स में पिग आयरन, बिलेट्स, टीएमटी बार, वायर रॉड और डक्टाइल आयरन पाइप शामिल हैं।
पिछले साल वेदांता के बोर्ड ने समूह को 6 अलग-अलग कंपनियों में बांटने की योजना यानि डीमर्जर को मंजूरी दी थी। उस समय वेदांता ने कहा था कि मार्च 2025 तक डीमर्जर पूरा हो जाना चाहिए। 31 जुलाई को, कंपनी ने घोषणा की कि 75% सुरक्षित लेनदारों ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जून 2024 के आखिर तक कंपनी का शुद्ध कर्ज 61,324 करोड़ रुपये का था। ग्रॉस कर्ज 78,016 करोड़ रुपये था। 8 अगस्त को बीएसई पर वेदांता का शेयर 2 प्रतिशत गिरावट के साथ 422.35 रुपये पर बंद हुआ है। 20 जुलाई 2024 के आखिर तक कंपनी में प्रमोटर्स के पास 56.38 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।