नवंबर महीने के दौरान खाने-पीने से जुड़ी सामानों की महंगाई दर (Food inflation) घटकर तीन महीने के अपने निचले स्तर पर 9 प्रतिशत पर आ गई। वहीं सब्जियों से जुड़ी महंगाई दर एक महीने पहले के 42.2 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत पर आ गई। हालांकि मनीकंट्रोल की एक एनालिसिस से पता चलता है कि सर्दियों की सब्जियां अभी भी पहले की तुलना में काफी महंगी बनी हुई हैं। आलू की कीमत तो पिछले 4 सालों के सबसे उच्चतम पर पहुंच गई। इसके अलावा गाजर, मूली, फूलगोभी और पत्तागोभी की महंगाई भी नवंबर में बढ़ गई।
सब्जियों की महंगाई दर के लिए 19 सब्जियों के दामों को ट्रैक किया जाता है। इस 19 में से 17 वस्तुओं के दाम में नवंबर महीने के दौरान 10 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई। वहीं 10 वस्तुओं के दाम में 20 फीसदी से भी अधिक का उछाल देखा गया।
लहसुन की कीमतों में सबसे अधिक उछाल आया, जिसकी महंगाई दर 85.1 प्रतिशत रही, जबकि पिछले महीने यह 82.8 प्रतिशत थी। इसके बाद दूसरे स्थान पर आलू रहा, जिसकी कीमत में 66.6 प्रतिशत की उछाल आई।
सर्दियों की बाकी सब्जियों की बात करें तो, फूलगोभी की महंगाई दर 47.7 प्रतिशत के साथ 33 महीने के उच्चतम स्तर पर रही। वहीं पत्तागोभी की महंगाई 43.6 प्रतिशत के साथ नवंबर में अपने लगभग तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। टमाटर की कीमतों में अक्टूबर के 110 प्रतिशत के मुकाबले कमी आई, लेकिन फिर भी यह नवंबर में 41 प्रतिशत के उच्च स्तर पर थीं।
गाजर की कीमतों में 32 महीनों में सबसे तेज बढ़ोतरी हुई और महंगाई पिछले महीने के 22.8 प्रतिशत से बढ़कर 33.4 प्रतिशत हो गई है। पालक और दूसरी पत्तेदार सब्जियों में नवंबर में 24.6 प्रतिशत की महंगाई देखी गई, जो पिछले एक दशक से अधिक समय में सबसे अधिक है। नवंबर में गाजर का औसत मंडी भाव पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक था।
इस बीच नवंबर में खुदरा महंगाई दर घटकर 5.5 प्रतिशत पर आ गई, जो इसके पिछले महीने 6.2 प्रतिशत थी। महंगाई की इस ऊंची दर ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को ब्याज दरों में कटौती करने से रोक रखा है। RBI ने दिसंबर की अपनी समीक्षा बैठक में लगातार ग्यारहवीं बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2025 के लिए अपने महंगाई अनुमानों को भी पहले के 4.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.8 प्रतिशत कर दिया है।