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ट्रंप का ट्रेड वॉर: क्या दुनिया फिर देखेगी 'निक्सन शॉक' जैसी तबाही?

ट्रंप से पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने भी कुछ ऐसा किया था। रिचर्ड निक्सन ने 15 अगस्त 1971 को अचानक गोल्ड स्टैंडर्ड समाप्त करने का ऐलान करके पूरी दुनिया को चौंका दिया था। इस घटना को 'गोल्ड शॉक' के नाम से भी जाना जाता है। दुनिया उस समय भी उतनी ही हैरान थी जितनी आज है। अब ट्रंप के 'टैरिफ शॉक' की तुलना निक्सन के इसी 'गोल्ड शॉक' से की जा रही है

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Apr 14, 2025 पर 1:53 PM
ट्रंप का ट्रेड वॉर: क्या दुनिया फिर देखेगी 'निक्सन शॉक' जैसी तबाही?
निक्सन के 'गोल्ड शॉक' के बाद अमेरिकी शेयर बाजार ने 1980 तक अपनी आधी वैल्यू खो दी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी ने पूरी दुनिया को झटका दिया है। ट्रंप बाकी दुनिया के साथ अमेरिका के रिश्ते को नए सिरे से गढ़ने के लिए टैरिफ का सहारा ले रहे हैं। यह पिछले कई दशकों से चले आ रहे ग्लोबल व्यापार नियमों के उलट है। हालांकि ट्रंप पहले ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं है, जिन्होंने ग्लोबल व्यापार नियमों को झटका दिया है। इनसे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने भी कुछ ऐसा किया था। रिचर्ड निक्सन ने 15 अगस्त 1971 को अचानक गोल्ड स्टैंडर्ड समाप्त करने का ऐलान करके पूरी दुनिया को चौंका दिया था। इस घटना को 'गोल्ड शॉक' के नाम से भी जाना जाता है। दुनिया उस समय भी उतनी ही हैरान थी जितनी आज है। अब ट्रंप के 'टैरिफ शॉक' की तुलना निक्सन के इसी 'गोल्ड शॉक' से की जा रही है।

निक्सन ने क्या किया था और क्यों?

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1944 में अमेरिकी डॉलर को सोने से जोड़कर एक स्थिर एक्सचेंज रेट तय की गई थी। वो दर थी 35 डॉलर प्रति औंस सोना। लेकिन जब निक्सन 1969 में राष्ट्रपति बने, तब तक दुनिया में मौजूद डॉलर की मात्रा, अमेरिका के कुल गोल्ड रिजर्व से चार गुना ज्यादा हो चुकी थी। इससे डॉलर का मूल्य कृत्रिम रूप से ऊंचा हो गया था, जिसके चलते अमेरिका का निर्यात महंगा और आयात सस्ता हो गया।

निक्सन चाहते थे कि डॉलर का अवमूल्यन हो और चीन जैसे देशों की मुद्रा मजबूत हो। यही शिकायत आज ट्रंप की भी है।

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