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बच्चों में कैंसर क्यों होता है? इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, डॉक्टर से जानें पूरी जानकारी

Cancer: कैंसर का नाम सुनते ही डर लगना स्वाभाविक है, लेकिन समय पर बीमारी की पहचान और सही इलाज से कई मरीजों की जान बचाई जा सकती है। बच्चों में होने वाला कैंसर बड़ों से काफी अलग होता है और इसके शुरुआती लक्षण भी कई बार सामान्य बीमारी जैसे दिखाई देते हैं। आखिर बच्चों में कैंसर क्यों होता है, इसके कौन-कौन से संकेत हैं और माता-पिता को किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं

Anchal Jhaअपडेटेड Aug 30, 2026 पर 4:03 PM
बच्चों में कैंसर क्यों होता है? इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, डॉक्टर से जानें पूरी जानकारी
बच्चों में होने वाले कैंसर में ल्यूकीमिया यानी रक्त कैंसर सबसे आम है।

बच्चे के बार-बार बीमार पड़ने पर ज्यादातर माता-पिता इसे मौसम बदलने, संक्रमण या सामान्य कमजोरी से जोड़कर देखते हैं। लेकिन अगर बुखार बार-बार लौट रहा हो, हड्डियों में लगातार दर्द हो, शरीर पर बिना चोट के नीले निशान पड़ रहे हों या कोई असामान्य गांठ दिखाई दे रही हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये लक्षण कई सामान्य बीमारियों में भी हो सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं।

हाल ही में द लैंसेट रीजनल हेल्थ–साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित एक अध्ययन ने दक्षिण एशिया में बच्चों में होने वाले कैंसर के बोझ पर ध्यान खींचा है। अध्ययन के मुताबिक, सार्क देशों में बच्चों के कैंसर के करीब 69 प्रतिशत मामले भारत में सामने आते हैं। भारत की बड़ी आबादी और यहां जांच व उपचार की बेहतर उपलब्धता भी इस आंकड़े की एक वजह हो सकती है। वहीं, जागरूकता और समय पर जांच की कमी के कारण कुछ मामलों की पहचान देर से होने की आशंका भी रहती है।

क्या बदलती जीवनशैली और पर्यावरण जिम्मेदार हैं?

बदलता खानपान, प्रदूषण और रसायनों का बढ़ता संपर्क आज बच्चों की सेहत को लेकर कई सवाल खड़े करता है। हालांकि, विशेषज्ञ साफ तौर पर कहते हैं कि बच्चों में होने वाले कैंसर को केवल जीवनशैली की वजह से नहीं जोड़ा जा सकता। राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के हेमेटोलॉजिस्ट और बोन मैरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, के अनुसार बच्चों में कैंसर के ज्यादा मामले सामने आने की एक वजह यह हो सकती है कि अब पहले के मुकाबले बीमारी की पहचान बेहतर हो रही है। ज्यादा बच्चे अस्पतालों और कैंसर उपचार केंद्रों तक पहुंच रहे हैं, इसलिए पहले से अधिक मामले सामने आ रहे हैं।

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