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टल सकता है हॉलमार्किंग अनिवार्य करने का फैसला, छोटे शहरों में बढ़ सकती है समय सीमा

देश में 15 जून से हालमार्किंग लागू होनी है लेकिन अभी भी बहुत से छोटे शहरों में इसके लिए सेंटर नहीं है.
अपडेटेड Jun 15, 2021 पर 23:18  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

हॉलमार्किंग अनिवार्य करने का फैसला टल सकता है। देश में 15 जून से हालमार्किंग लागू होनी है लेकिन अभी भी बहुत से छोटे शहरों में इसके लिए सेंटर नहीं है। यही कारण है कि बहुत से ज्वेलर्स मांग कर रहे हैं कि उन्हे थोड़ी और मोहलत दी जाए। इस मुद्दे पर आज ज्वेलर्स वाणिज्य मंत्री से मुलाकात हो रही है। बैठक में BIS अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।


आज शाम ज्वैलर्स, BIS के अधिकारियों और पीयूष गोयल की मीटिंग हो रही है। हॉलमार्किंग UID में छूट मिल सकती है। हॉलमार्किंग के लिए जरूरी infrastructure नहीं होने के कारण छोटे शहरों में हालमार्क सेंटर नहीं हैं। छोटे शहरों के लिए हॉलमार्किंग के समय सीमा बढ़ाई जा सकती है। 


 बता दें कि 15 जून से अनिवार्य हॉलमार्किंग लागू होगी। पहले अनिवार्य हॉलमार्किंग 1 जून से लागू होनी थी। ज्वेलर्स ने डेडलाइन 1 साल बढ़ाने की मांग की थी। सरकार ने ज्वेलर्स को मात्र 15 दिन का वक्त दिया। रोलआउट से जुड़े मुद्दे सुलझाने के लिए कमेटी बनाई गई है।


ज्वेलर्स की क्या हैं मुश्किलें


15 जून से नियम लागू होने से ज्वेलर्स को दिक्कत है। देश में पर्याप्त मात्रा में हॉलमार्किंग सेंटर नहीं हैं। 11 राज्यों में एक भी हॉलमार्किंग सेंटर नहीं है। 66.58% जिलों में अभी हॉलमार्किंग सेंटर नहीं है। 15 जून तक 6500 करोड़ पीस की हॉलमार्किंग करना होगा। 15 दिन में इतनी ज्वेलरी की हॉलमार्किंग मुश्किल है। छोटे व्यापारियों को कारोबार बंद करना पड़ सकता है।


कोरोना के बीच पर्याप्त सेंटर नहीं होने से ज्यादा मुश्किल हो रही है। हॉलमार्किंग सकारात्मक कदम लेकिन जल्दबाजी से नुकसान हो सकता है। बता दें कि सिर्फ 14, 18, 22 कैरेट की हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाया गया है। बाकी कैरेट की ज्वेलरी की बिक्री पर एक तरह से रोक लगी है। निवेश के लिए लोग 23, 24 कैरेट की ज्वेलरी खरीदते हैं। कई जगहों पर 20, 21 कैरेट ज्वेलरी ज्यादा बिकती है। देश में ज्वेलरी के लिए UID लागू करने में दिक्कत है। ग्रामीण क्षेत्रों में हॉलमार्किंग की कागजी कार्रवाई में दिक्कत होती है।


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