क्रूड ऑयल की कीमतों में 10 सितंबर को भी तेजी जारी रही। ब्रेंट क्रूड का प्राइस 105 डॉलर पर पहुंच गया। इस साल 25 मई के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड का भाव इस लेवल पर पहुंचा है। अमेरिका और ईरान के बीच टेंशन लगातार बढ़ रहा है, जिसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ रहा है।
चीन की क्रूड की खरीदारी का भी कीमतों पर असर
क्रू्ड ऑयल की कीमतों में तेजी की कुछ दूसरी वजहें भी हैं। चीन ने फिर से क्रूड ऑयल की अच्छी खरीदारी शुरू कर दी है। उधर, सऊदी अरब ने कहा है कि उसके क्रूड के उत्पादन में तेज गिरावट आई है। इसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा है। ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में जॉर्डन में अमेरिकी युद्धपातों पर मिसाइल से हमले किए हैं। इससे हालात लगातार खराब होने की तरफ बढ़ रहे हैं।
WTI क्रूड की कीमतें भी 100 डॉलर के पार
भारतीय समय के मुताबिक, शाम 6:45 बजे ब्रेंट क्रूड का प्राइस 4 फीसदी उछलकर 105.41 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। WTI क्रूड भी 4.41 फीसदी उछाल के साथ 100 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ लड़ाई नवंबर में मिड टर्म इलेक्शंस के बाद खत्म होगी। इधर, ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका हमले जारी रखता है तो वह जवाबी हमले करेगा।
अगस्त के लेवल से 30 फीसदी चढ़ चुका है क्रूड
अगस्त की शुरुआत के मुकाबले ब्रेंट क्रूड की कीमत 30 फीसदी चढ़ चुकी है। बताया जाता है कि सऊदी अरब में क्रूड का उत्पादन गिरकर इस साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसकी वजह हूती विद्रोहियों की धमकी है, जिसमें कहा गया है कि वे सऊदी अरब के पश्चिमी बंदरगाहों से गुजरने वाले ऑयल टैंकर्स को निशाना बनाएंगे।
चीन की खरीदारी पर निर्भर करेगी कीमतें
एनालिस्ट्स का कहना है कि मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ने की वजह से ब्रेंट फिर से 100 डॉलर के पार हो गया है, लेकिन इसका इस लेवल पर टिके रहना चीन के रुख पर निर्भर करेगा। चीन दुनिया में क्रूड ऑयल का सबसे बड़ा इंपोर्टर है। उसने हाल के कुछ महीनों में क्रूड की खरीदारी बढ़ाई है। इसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा है।
क्रूड में उछाल भारत के लिए चिंता की बात
क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए चिंता की बात है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है। क्रूड महंगा होने का असर भारत के इंपोर्ट बिल पर पड़ता है। लंबे समय तक क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बने रहने पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियां फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा सकती हैं। साथ ही सीएनजी और पीएनजी के दाम भी बढ़ सकते हैं, जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा।