Commodity Market: सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक सरकार ने दलहन की खरीदारी शुरु की। सरकारी एजेंसियों NCCF, NAFED के माध्यम से यह खरीद की जा रही है। किसान अपनी तुअर और उड़द की फसल को एमएसपी पर बेचने के लिए राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) के ई-संयुक्ति पोर्टल या मोबाइल एप, अथवा नेफेड (NAFED) के ई-समृद्धि पोर्टल/मोबाइल एप पर पंजीकरण कर सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार तुअर, उड़द, मसूर और चना की खरीदारी की जा ही है। पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी रखी गई है, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो। साथ ही कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाना है। सरकार खरीफ की 100% दालें MSP पर खरीदेगी।
इस बीच कृषि मंत्रालय की राज्यों को चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में खरीद पर लेवी, मंडी टैक्स माफ करने को कहा गया है। PSS के तहत दालों की खरीदारी होगी। सीधे किसानों खरीदारी राज्य सरकारें करें।
बाजार जानकार का कहना है कि एमएसपी पर दलहन खरीद से न सिर्फ किसानों की आय को स्थिरता मिलेगी, बल्कि देश में दालों के उत्पादन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। यह कदम दलहन आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बतातें चलें कि NAFED पर 1.18 मिलियन किसान रजिस्टर्ड है जबकि NCCF में 1,60 मिलियन किसान रजिस्टर्ड है।
2026 में दालों की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती
IPGA सेक्रेटरी सतीश उपाध्याय ने कहा कि MSP पर खरीदारी की शुरुआत हुई है। NCCF ने गुजरात और कर्नाटक में तुअर दाल खरीद के लिए अपने सेंटर को खोला है जबकि तमिलनाडु और मध्यप्रदेश में उड़द दाल खरीद के लिए सेंटर खोले है। महाराष्ट्र में बीएमसी इलेक्शन के चलते MSP पर खरीदारी शुरु होगी।
सरकार ने NCCF और NAFED दोनों का मिलाकर 12500 टन तुअर दाल खरीदारी का टारगेट रखा है । 5500 लाख टन उड़द की खरीद का टारगेट रखा है। देखना होगा कि पहले स्टेज में यह कितनी खरीदारी कर पाते है।
MSP और मंडी के बीच का भाव कम हो रहा है। अगर बाजार बढ़ा तो MSP पर किसान सरकार को ज्यादा माल नहीं मिलेगा। अगर अंतर ज्यादा रहा तो ही किसान सरकार को दालें देंगे। तुअर का भाव 8000 रुपये के पार निकला तो किसान अपना माल मंडी में ही बेचेगा। सरकार के पास कैरी ओवर स्टॉक नहीं है, बफर कम है
उन्होंने आगे कहा कि दालों के बाजार में थोड़ा सुधार दिख रहा है। तुअर मौजूदा भाव से 5-10 फीसदी तक का उछाल संभव है। हालांकि मौसम दालों के बाजार के लिए अहम होगे। अगर बारिश हुई तो चने के दाम बढ़ सकते है। कुल मिलाकर यहीं कहना चाहूंगा कि 2026 में दालों की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।