Crude Oil Price: RED SEA में हूती अटैक और अमेरिका में कम प्रोडक्शन अनुमान से उछला क्रूड, क्या $70 के ऊपर जाएगा भाव या आएगी गिरावट

Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर उबाल देखने को मिल रहा है। कच्चे तेल की कीमतें 2 हफ्ते की ऊंचाई पर क्रूड पहुंचा। RED SEA में हूती अटैक और अमेरिका में कम प्रोडक्शन अनुमान के बाद ब्रेंट 70 डॉलर के पार निकला है। वहीं WTI में भी $68 के ऊपर कारोबार कर रहा है। ट्रंप टैरिफ से कीमतों को सपोर्ट मिला

अपडेटेड Jul 09, 2025 पर 2:44 PM
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कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर उबाल देखने को मिल रहा है। कच्चे तेल की कीमतें 2 हफ्ते की ऊंचाई पर क्रूड पहुंचा।

Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर उबाल देखने को मिल रहा है। कच्चे तेल की कीमतें 2 हफ्ते की ऊंचाई पर क्रूड पहुंचा। RED SEA में हूती अटैक और अमेरिका में कम प्रोडक्शन अनुमान के बाद ब्रेंट 70 डॉलर के पार निकला है। वहीं WTI में भी $68 के ऊपर कारोबार कर रहा है। ट्रंप टैरिफ से कीमतों को सपोर्ट मिला। बाजार को US में उत्पादन गिरने की आशंका है। हूती विद्रोहियों के रेड-सी में जहाजों पर हमले जारी किया।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर बुधवार को कारोबार के शुरुआती घंटे के दौरान जुलाई कच्चे तेल का वायदा 0.42 फीसदी की गिरावट के साथ 5,861 रुपये पर कारोबार कर रहा था, जबकि पिछला बंद भाव 5,886 रुपये था। वहीं अगस्त वायदा 0.36 फीसदी की गिरावट के साथ 5,765 रुपये पर कारोबार कर रहा था, जबकि पिछला बंद भाव 5,786 रुपये था।

उद्योग निकाय अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (एपीआई) के अनुसार, 4 जुलाई को समाप्त सप्ताह में अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार 71 लाख बैरल बढ़ा। बाजार को इस अवधि के दौरान इसमें 28 लाख बैरल की गिरावट की उम्मीद थी। एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (ईआईए) के आधिकारिक आंकड़े बुधवार को जारी होने की उम्मीद है। इससे अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।


इस बीच कच्चे तेल की चाल पर नजर डालें तो 1 हफ्ते में एमसीएक्स पर कच्चा तेल 5 फीसदी, ब्रेंट क्रूड 1 फीसदी और WTI पर क्रूड 1 फीसदी चढ़ा है। जबकि 1 महीने में एमसीएक्स पर कच्चे तेल ने 6 फीसदी, ब्रेंट पर क्रूड 5 फीसदी, WTI पर क्रूड 5 फीसदी की छलांग लगाई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विभिन्न देशों पर टैरिफ लगाने के फैसले को लेकर बाजार सतर्क रहे। निवेशकों को डर है कि यूएस ट्रेड टैरिफ ग्लोबल ट्रेड (वैश्विक व्यापार) को प्रभावित करेगा। इससे कच्चे तेल जैसी वस्तुओं की मांग पर असर पड़ सकता है।

इस बीच, RED SEA में जहाजों पर हूतियों द्वारा फिर से किए गए हमलों से कच्चे तेल की कीमतों को कुछ सहारा मिला। पश्चिम एशिया से दुनिया भर के विभिन्न बाजारों में कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए लाल सागर मार्ग महत्वपूर्ण है।

क्रूड की मांग में तेजी की उम्मीद नहीं

कच्चे तेल की आगे की चाल पर बात करते हुए एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा ने कहा कि यूएस की इन्वेंटरी में ऐसा कुछ खास नहीं है जिससे तेल की कीमतें ऊपर जाए। लेकिन ट्रंप के लगातार टैरिफ वॉर को लेकर थोड़ी अनिश्चितता जरुर बनी हुई है क्योंकि उन्होंने ब्रिक्स पर एक्स्ट्रा टैक्स लगाने की बात कही है। ऐसे ब्राजील, चाइना, भारत जैसे तमाम ऐसे बहुत सारे ब्रिक्स देश है जो अमेरिका को रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट एक्सपोर्ट्स करते हैं। हालांकि अमेरिका काफी हद तक एनर्जी इंडिपेंडेंट हो चुका है, लेकिन उसके बावजूद वो बहुत भारी मात्रा में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का और कच्चे तेल का भी इंपोर्ट करता है। हालांकि डिमांड को लेकर ज्यादा कोई असर नहीं आता दिख रहा जिसके चलते बाजार अपने तरह से रिएक्ट कर रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत में लगातार क्रूड की मांग बढ़ रही है। अभी देश की मांग 5.5 मिलियन बैरल प्रति दिन है। जल्द बढ़कर 6.7 मिलियन बैरल प्रति दिन हो जाएगी

उन्होंने आगे कहा कि अभी फिलहाल जियोपॉलिटिकल तनाव भी ज्यादा नहीं है जिसके चलते क्रूड $70 के ऊपर टिकता हुआ दिखाई नहीं देता। हालांकि कल क्या होगा यह अभी कहना मुश्किल है, लेकिन 70 डॉलर के ऊपर टिकता नजर नहीं आता।

अमेरिका हर हाल में क्रूड की कीमतें 60 डॉलर पर लाना चाहता है। वहीं सऊदी रूस नहीं चाहते कि भाव 70 डॉलर के नीचे फिसले। जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में कशमकश बनी रहेगी। नरेंद्र तनेजा ने कहा कि जब तक बाजार में कोई बड़ी रुकावट नहीं आ जाती, चाहे वो जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण हो या डिमांड या फिर टैरिफ को लेकर तब तक दाम नहीं चढ़ेंगे।

 

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