Gold-Silver on MCX: सोने के मुकाबले चार गुना ज्यादा गिरी चांदी, दीपावली से 10 दिन पहले धड़ाम हुए दाम!
दीपावली में अभी पूरे 10 दिन बचे हैं, ऐसे में जो लोग सोना या चांदी दीपावली से पहले खरीदने की सोच रहे हैं, उनके लिए खुशखबरी है. दरअसल, आज यानी गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट देखी गई. चलिए, जानते हैं अब क्या है गोल्ड और सिल्वर की नई कीमत.
MCX पर गुरुवार को भी सोने-चांदी में बिकवाली जारी रही.
दीपावली से ठीक 10 दिन पहले सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव दिख रहा है. आज यानी गुरुवार, 29 अक्टूबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर दिसंबर का गोल्ड फ्यूचर 0.28% फिसलकर ₹1.43 लाख प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा। जबकि, चांदी ने इससे कहीं ज्यादा गहरा गोता लगाया और दिसंबर सिल्वर फ्यूचर 1.18% गिरकर ₹1.92 लाख प्रति किलो पर आ गया।
माना जा रहा है कि इस कमजोरी की जड़ अमेरिका में है। दरअसल, निवेशक US फेडरल रिजर्व के ताजा ब्याज दर फैसले को तौल रहे हैं और अब महंगाई के नए आंकड़ों की राह देख रहे हैं, ताकि पता चल सके कि आगे ब्याज दरों की नीति किस करवट बैठेगी।
MCX पर कैसी रही सोने-चांदी की चाल?
गुरुवार का कारोबार शुरू होते ही गोल्ड-सिल्वर स्क्रीन पर लाल नजर आई। ये कोई एक दिन में अचानक आई गिरावट नहीं है, बल्कि पहले से चला आ रहा दबाव ही आगे बढ़ा है। सोने में गिरावट सीमित रही, लेकिन चांदी ने बाजार को ज्यादा चौंकाया। सोना जहां 0.28% नीचे था, वहीं चांदी 1.18% टूटी। मतलब चांदी की गिरावट सोने के मुकाबले चार गुना से भी ज्यादा रही। जो निवेशक चांदी में दांव लगाए बैठे थे, उनके लिए ये सत्र सोने वालों से कहीं ज्यादा भारी पड़ा।
चांदी पर सबसे ज्यादा चोट क्यों?
चांदी की इस तेज फिसलन पर Lemonn के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग की राय साफ है। उनके मुताबिक, चांदी में आई ज्यादा तेज गिरावट ये दिखाती है कि बिकवाली के दबाव के आगे वो कहीं ज्यादा कमजोर है। इस कमजोरी को समझने के लिए दोनों धातुओं के स्वभाव पर नजर डालनी होगी। सोना और चांदी, दोनों की कीमतें ब्याज दरों की उम्मीदों और अमेरिकी डॉलर की चाल पर प्रतिक्रिया देती हैं। इस हिसाब से दोनों एक ही नाव में सवार हैं। फर्क बस इतना है कि चांदी की नाव ज्यादा डगमगाती है।
इसके पीछे दो वजहें हैं। चांदी सिर्फ गहनों या निवेश की धातु नहीं है, इंडस्ट्री में भी उसकी मांग रहती है। इंडस्ट्रियल डिमांड से ये जुड़ाव उसे ज्यादा उतार-चढ़ाव वाला बना देता है। दूसरी बात ये कि निवेशकों का मूड बदलते ही चांदी उस पर सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी से प्रतिक्रिया देती है। बाजार में जरा सी घबराहट आई नहीं कि चांदी की कीमत पर उसका असर ज्यादा गहरा दिखने लगता है। यही वजह है कि दबाव के दिनों में सोना जहां थोड़ा झुकता है, वहीं चांदी ज्यादा नीचे फिसल जाती है।
Fed ने दरें नहीं बदलीं फिर भी क्यों नहीं मिला सहारा?
पहली नजर में Fed का फैसला सोने के लिए राहत भरा लग सकता था। US फेडरल रिजर्व ने अपनी पॉलिसी ब्याज दर को 3.75%-4.00% पर बिना किसी बदलाव के रखा। आमतौर पर बाजार ऐसे फैसले को सुकून की खबर मानता है, क्योंकि दरें बढ़ी नहीं।
लेकिन असली पेंच फैसले के अंदर छिपा था। Fed के 2 अधिकारी ब्याज दर बढ़ाने के पक्ष में थे। बस यही बात बाजार के दिमाग में अटक गई। जब नीति बनाने वालों में से ही कुछ लोग दरें बढ़ाने की बात कर रहे हों, तो आगे सख्ती की संभावना चर्चा के केंद्र में बनी रहती है। इसी वजह से फैसले के बाद सोने-चांदी को जो सहारा मिल सकता था, वो टिक नहीं पाया।
अब सवाल ये कि ऊंची ब्याज दरें सोने को चोट क्यों पहुंचाती हैं। इसे एक घरेलू मिसाल से समझा जा सकता है। मान लीजिए आपके सामने दो रास्ते हैं। एक तरफ लॉकर में रखा सोना है, जो चुपचाप पड़ा रहता है और उस पर कोई ब्याज नहीं मिलता। दूसरी तरफ ऐसे एसेट हैं, जिन पर ब्याज की कमाई होती है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो दूसरा रास्ता ज्यादा लुभाने लगता है। ऐसे में बिना ब्याज वाले सोने की तरफ खिंचाव कम हो जाता है और उसकी कीमत पर दबाव आ जाता है।
अब किस आंकड़े पर टिकी हैं बाजार की नजरें?
सोने-चांदी के लिए अगला बड़ा ट्रिगर अमेरिका की पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर यानी PCE महंगाई रिपोर्ट है। ये वो अहम पैमाना है, जिस पर फेडरल रिजर्व की नजर रहती है। ये आंकड़े Fed के आगे के ब्याज दर फैसलों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदल सकते हैं। और जैसे ही उम्मीदें बदलेंगी, उसका असर सोने और चांदी की दिशा पर पड़ेगा। आने वाले दिनों में ये रिपोर्ट एक तरह से कीमती धातुओं का रास्ता तय करने वाला मोड़ बन सकती है।
PCE के साथ-साथ निवेशक अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड की चाल पर भी पैनी नजर रखेंगे। ये दोनों चीजें सोने जैसे बिना ब्याज वाले एसेट्स की मांग पर असर डाल सकती हैं। डॉलर और यील्ड का रुख जिस तरफ झुकेगा, उसकी छाया सोने-चांदी की कीमतों पर भी दिख सकती है।
घरेलू निवेशकों के लिए MCX की ताजा कीमतें यही बता रही हैं कि दोनों धातुओं में कमजोरी जारी है और चांदी पर दबाव ज्यादा है। लेकिन तस्वीर अभी ठहरी हुई नहीं है। जैसे-जैसे नए आर्थिक आंकड़े आएंगे और अमेरिकी ब्याज दरों की नीति को लेकर उम्मीदें बदलेंगी, कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
अब बात उन लोगों की, जो ट्रेडिंग के लिए नहीं बल्कि घर के लिए सोना-चांदी खरीदते हैं। गहने खरीदने वाले हों या सोने-चांदी के सिक्के और बार लेने वाले, कीमतों में आई शॉर्ट टर्म गिरावट उनके खरीदारी के फैसले पर असर डाल सकती है। लेकिन कीमतें आगे भी ऊपर-नीचे हो सकती हैं।
इस मौसम में मांग को लेकर इंडस्ट्री का भरोसा बना हुआ है। MMTC-PAMP के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO समित गुहा ने कहा कि त्योहारों के सीजन में सोने और चांदी में, खासकर बार और सिक्कों में, ग्राहकों की दिलचस्पी मजबूत बने रहने की उम्मीद है। इसकी वजह उनका सांस्कृतिक महत्व और आने वाला शादियों का सीजन है।
गुहा ने ये भी कहा कि सोने की ऊंची कीमतें ग्राहकों को छोटे वजन वाले बार और सिक्कों की तरफ मोड़ सकती हैं। वहीं, सुविधा की वजह से डिजिटल गोल्ड में दिलचस्पी को सहारा मिल सकता है, खासकर युवा निवेशकों के बीच।
रिटेल खरीदारों के लिए एक बात याद रखना जरूरी है। एक सत्र की गिरावट को ये मान लेना ठीक नहीं कि कीमतें अब सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। बेहतर ये है कि शॉर्ट टर्म की कीमतों की हलचल और अपनी असली खरीदारी की जरूरत को अलग-अलग करके देखें, और फैसला उसी जरूरत के हिसाब से लें, सिर्फ एक दिन की गिरावट देखकर नहीं।