Crude Oil: कच्चे तेल की कीमतों में लगातार 7वें दिन दबाव, क्या 70$ तक जाएंगे भाव, जानिए क्या है एक्सपर्ट की राय

कच्चे तेल में लगातार 7वें दिन दबाव कायम है। एक हफ्ते में कच्चे तेल का दाम करीब 4% तक गिर चुके हैं। नवंबर 2024 के बाद एक हफ्ते में कच्चे तेल के दाम सबसे ज्यादा गिरे है। ब्रेंट का भाव 78 डॉलर के नीचे फिसला है जबकि WTI का भाव 74 डॉलर तक गिरा है।

अपडेटेड Jan 24, 2025 पर 1:52 PM
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ट्रंप के बयान के बाद क्रूड करीब 2 हफ्तों के निचले स्तरों पर आया। एक हफ्ते में 3% से ज्यादा भाव गिरे। US का रिजर्व लगातार 9वें हफ्ते गिरा।

कच्चे तेल में लगातार 7वें दिन दबाव कायम है। एक हफ्ते में कच्चे तेल का दाम करीब 4% तक गिर चुके हैं। नवंबर 2024 के बाद एक हफ्ते में कच्चे तेल के दाम सबसे ज्यादा गिरे है। ब्रेंट का भाव 78 डॉलर के नीचे फिसला है जबकि WTI का भाव 74 डॉलर तक गिरा है। MCX पर कच्चा तेल के दाम 6500 के नीचे फिसले है।

दरअसल, दावोस में ट्रंप के बयान ने कच्चे तेल की कीमतों में दबाव बनाया है। ट्रंप ने कहा OPEC+ देश कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट लाएंगे। उनका कहना है कि कच्चे तेल में गिरावट से महंगाई दर घटेगी। महंगाई दर में गिरावट आएगी तो ब्याज दरें भी घटेंगी। US के पास दुनिया का सबसे ज्यादा ऑयल और गैस के भंडार है। अमेरिका अपने ऑयल और गैस के भंडार का इस्तेमाल करेगा। दिसंबर की 40% महंगाई सिर्फ एनर्जी कीमतों से बढ़ी है।

ट्रंप के बयान के बाद क्रूड करीब 2 हफ्तों के निचले स्तरों पर आया। एक हफ्ते में 3% से ज्यादा भाव गिरे। US का रिजर्व लगातार 9वें हफ्ते गिरा।

एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा ने कहा कि WEF में ट्रंप के बयान ने क्रूड पर दबाव बनाया है। क्रूड का उत्पादन अमेरिका बढ़ाएगा। ट्रंप ने OPEC+ देशों से फोन पर बात की है। ट्रंप कच्चे तेल के दाम कम करना चाहते हैं। ट्रंप डॉलर को मजबूत करना चाहते हैं। नरेंद्र तनेजा ने कहा कि क्रूड सस्ता होगा तो डॉलर मजबूत होगा। अभी कच्चे तेल की जरुरत पूरी दुनिया में है। ट्रंप के बयान से बाजार सटीक अंदाजा नहीं लगा पा रहा है। आने वाले कुछ महीनों में क्रूड 70 डॉलर प्रति बैरल का भाव दिखा सकता है और अगर ट्रंप की नीति सफल रही क्रूड $70 के नीचे जा सकता है।


उन्होंने आगे कहा कि बाजार में क्रूड की नहीं सप्लाई करने वाले जहाजों की कमी है। ट्रंप युक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। चीन से भी युक्रेन युद्ध को खत्म करने में मदद करने को कहा गया है। हालांकि जियोपॉलिटिकल तनाव के चलते बीच-बीच में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है। अगर हालात बिगड़े तो दाम चढ़ेंगे। रूस भारत को ज्यादा छूट दे सकता है।

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