Crude Oil Price: ब्रेंट क्रूड का प्राइस आखिरकार 9 सितंबर को 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया। 24 जुलाई के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार गया है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ रहा है। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान मध्यपूर्व में अमेरिका के सहयोगी देशों के ठिकानों को निशाना बना रहा है।
अमेरिका का ईरान के 5 ऑयल टैंकर्स ध्वस्त करने का दावा
8 सितंबर को अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरान के पांच ऑयल टैंकर्स को ध्वस्त कर दिया है। उसने कहा कि ईरान ने अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत पर बैलेस्टिक मिसाइल से हमला किया था। इसके जवाब में उसने ईरानी ऑयल टैंकर्स को निशाना बनाया है। इससे मध्यपूर्व में एक बार फिर से स्थिति काफी गंभीर हो गई है।
ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई में जॉर्डन पर किए हमलें
अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान ने जॉर्डन पर बैलेस्टिक मिसाइल से हमले किए हैं। उसने फारस की खाड़ी में दूसरे जहाजों को भी चेतावनी जारी की है। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने IRGC को उद्धृत करते हुए कहा है कि कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों के करीब स्थित सभी जहाजों के क्रू को अपने जहाज छोड़ देने चाहिए, क्योंकि उन्हें निशाना बनाया जाएगा।
क्रूड का भाव बीते 7 हफ्तों के सबसे ऊंचे लेवल पर
क्रूड ऑयल की कीमतें बीते सात हफ्तों में सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई हैं। एक हफ्ते में क्रूड का भाव 4 फीसदी चढ़ा है। बीते एक महीने में यह 14 फीसदी चढ़ा है। इस साल यानी 2026 में क्रूड का भाव अब तक 64 फीसदी उछला है। इधर, इंडिया का क्रूड बास्केट 100 डॉलर के पार हो गया है। इससे सरकार पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।
क्रूड में उछाल से भारत के लिए बढ़ सकता है संकट
भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी ऑयल इंपोर्ट करता है। इसका बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत आता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते सप्लाई बाधित होने से क्रूड की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं। क्रूड में उछाल से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा। इस साल अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से भारत में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और पीएनजी की कीमतें बढ़ाई हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने अपने लॉस कम करने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें चार बार बढ़ाई हैं।
शेयर बाजारों पर भी पड़ेगा असर
क्रूड में उछाल का असर शेयर बाजारों पर भी पड़ेगा। खासकर पेंट, टायर, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर इसका असर पड़ेगा। एविएशन कंपनियों पर भी इसका असर पड़ेगा। एटीएफ की कीमतें बढ़ने से उनका कुल खर्च बढ़ जाएगा। भारतीय शेयर बाजारों पर पहले से दबाव है। 9 सितंबर को लगातार तीसरे दिन बाजार में बड़ी गिरावट दिखी।