क्रूड रिकॉर्ड ऊंचाई से 20% क्रैश कर चुका है, किस लेवल तक गिर सकता है प्राइस?

2 जून को क्रूड में बड़ी गिरावट दिखी। ब्रेंट क्रूड 3.37 फीसदी गिरकर 87.33 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड 3.23 फीसदी क्रैश कर 84.88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि, अभी अमेरिका-ईरान के बीच सुलह नहीं हुई है। इसके बावजूद क्रूड में इतनी बड़ी गिरावट आई है

अपडेटेड Jun 13, 2026 पर 12:47 PM
मई की शुरुआत में भाव 120 डॉलर प्रति बैरल की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था।

क्रूड की कीमतों में गिरावट पूरी दुनिया के लिए राहत की खबर है। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान में लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड का भाव आसमान में पहुंच गया था। मई की शुरुआत में भाव 120 डॉलर प्रति बैरल की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था। तब से भाव 20 फीसदी से ज्यादा क्रैश कर चुका है। सवाल है कि क्रूड का भाव गिरकर किस लेवल तक आ सकता है?

12 जून को क्रूड में बड़ी गिरावट

12 जून को क्रूड में बड़ी गिरावट दिखी। ब्रेंट क्रूड 3.37 फीसदी गिरकर 87.33 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड 3.23 फीसदी क्रैश कर 84.88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि, अभी अमेरिका-ईरान के बीच सुलह नहीं हुई है। इसके बावजूद क्रूड में इतनी बड़ी गिरावट आई है। अगर अगले 1-2 दिन में दोनों पक्षों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हो जाते हैं तो क्रूड में और गिरावट आ सकती है।


लाल सागर और पाइपलाइन से सप्लाई

क्रूड की कीमतों में तेजी की वजह इसकी कम सप्लाई थी। अमेरिका-ईरान की लड़ाई का असर क्रूड के ट्रांसपोर्टेशन पर पड़ा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते होने वाली सप्लाई नाममात्र की रह गई है। लेकिन, लाल सागर के लंबे रास्ते और पाइपलाइन के रास्ते सप्लाई जारी रहने से दुनिया में ऑयल की बहुत ज्यादा कमी नहीं हुई है। इस क्राइसिस से दुनिया अब एनर्जी के सोर्सेज के डायवर्सिफिकेशन के बारे में पहले से ज्यादा सोचने लगी है।

कीमतों पर डिमांड में कमी का असर

ऑयल की कीमतों में कमी की एक वजह इसकी डिमांड में कमी है। IEA का कहना है कि इस साल क्रूड की डिमांड में रोजाना 4,20,000 बैरल तक की कमी आ सकती है। क्रूड की ऊंची कीमतें, कमजोर आर्थिक गतिविधियां और फ्यूल की खपत घटाने के सरकार के उपायों का असर इसकी डिमांड पर पड़ा है। इस वजह से क्रूड की सप्लाई में कमी का उतना असर नहीं दिख रहा है, जितना पहले उम्मीद की गई थी।

मार्केट क्राइसिस से तालमेल बैठाता है

आम तौर पर क्राइसिस की स्थिति में कमोडिटी मार्केट खुद को नई स्थितियों के साथ ढालने की कोशिश करता है। कीमतों में उछाल से खपत घटने लगती है। लोग ऑयल का कम इस्तेमाल करने लगते हैं। एयरलाइंस कंपनियां फ्लाइट्स की संख्या घटा देती हैं। कंपनियां खुद को एनर्जी एफिशियंट बनाने पर फोकस बढ़ा देती हैं। इसका नतीजा यह होता कि शुरुआत में क्राइसिस जितनी बड़ी दिखती है, उतनी बड़ी रह नहीं जाती है।

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75-85 डॉलर तक जा सकता है भाव

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वैश्विक ग्रोथ में कमी आती है तो ऑयल की डिमांड पर उसका असर पड़ेगा। ऐसे में ब्रेंट क्रूड की कीमतें और गिर सकती हैं। अगर अमेरिका-ईरान में समझौता नहीं होता है तो भी ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर 75-85 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है। लेकिन, अगर अमेरिका और ईरान में लड़ाई फिर से भड़कती है तो क्रूड में फिर से उछाल आ सकता है।

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