गोल्ड में कमजोरी जारी रह सकती है। इस साल सोना जनवरी में 5,595 डॉलर प्रति औंस की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था। उसके बाद इसमें गिरावट दिखी है। रिकॉर्ड ऊंचाई से यह करीब 25 फीसदी क्रैश कर चुका है। इससे उन निवेशकों को बड़ा झटका लगा है, जिन्होंने कीमतों में तेजी जारी रहने की उम्मीद में बड़ा निवेश किया था।
हफ्ते के अंत में देश और विदेश में हल्की तेजी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि हफ्ते के अंत में गोल्ड में देश और विदेश में हल्की तेजी दिखी। लेकिन, इस तेजी के जारी रहने की उम्मीद नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड हल्की मजबूती के साथ 4222 डॉलर प्रति औंस था। इधर, भारत में कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में यह 1.17 फीसदी चढ़कर 1,50,675 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुआ।
स्टेट स्ट्रीट इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट के कमोडिटी एनालिस्ट आकाश दोशी ने कहा कि फिलहाल सोने के लिए दो चुनौतियां दिख रही हैं। पहला, अमेरिका में फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट बढ़ने की उम्मीद है। दूसरा, डॉलर में मजबूती है। इन दोनों की वजह से गोल्ड पर आगे दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि गोल्ड में तेजी तभी आ सकती है, जब मिडिलईस्ट में टेंशन खत्म हो जाएगा और क्रूड की कीमतें गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल पर आ जाएंगी।
3850-4000 डॉलर तक जा सकता है भाव
यूबीएस का कहना है कि गोल्ड में कमजोरी जारी रह सकती है। शॉर्ट टर्म में गोल्ड गिरकर 3,850-4000 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का असर गोल्ड पर पड़ेगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर गोल्ड की चमक घट जाती है। मध्यपूर्व में टेंशन की वजह से क्रूड की कीमतों में उछाल आया है। इससे दुनियाभर में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ी हैं। इससे अमेरिका, भारत सहित पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ा है।
इंटरेस्ट रेट बढ़ने का पड़ेगा असर
एक्सपर्ट्स का कहना है कि फेडरल रिजर्व महंगाई को बढ़ने से रोकने के लिए इस साल इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। उधर, डॉलर इंडेक्स में मजबूती का भी असर सोने पर पड़ रहा है। डॉलर में मजबूती से दुनिया में दूसरी करेंसी में गोल्ड खरीदना महंगा हो जाता है। इसका असर गोल्ड की डिमांड पर पड़ता है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी पर नजरें
एनालिस्ट्स की नजरें केंद्रीय बैंकों की गोल्ड की खरीदारी पर लगी हैं। पिछले कुछ सालों में गोल्ड में आई अप्रत्याशित तेजी में केंद्रीय बैंकों की गोल्ड की खरीदारी का बड़ा हाथ रहा है। यूबीएस का कहना है कि केंद्रीय बैंकों की गोल्ड की खरीदारी 750-1000 टन की रेंज में रह सकती है। उसने यह भी कहा है कि अगर गोल्ड 3,850-4000 डॉलर प्रति औंस की रेंज में आ जाता है तो यह खरीदारी का अच्छा मौका हो सकता है।