UP RERA New IFMS Rules: उत्तर प्रदेश में नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ जैसे शहरों में घर खरीदने वालों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) ने इंटेरेस्ट फ्री मेंटेनेंस सिक्योरिटी फंड्स के कलेक्शन, मैनेजमेंट, ट्रांसफर और सही इस्तेमाल को लेकर 12वां संशोधन करते हुए रेगुलेशन 47 के तहत नए सख्त नियम लागू कर दिए हैं।
अक्सर शिकायतें आती थीं कि बिल्डर होमबॉयर्स से मेंटेनेंस सिक्योरिटी के नाम पर मोटी रकम वसूल लेते थे, लेकिन उसका इस्तेमाल कहां हो रहा है, इसका कोई पारदर्शी हिसाब नहीं मिलता था। यूपी रेरा के इस कदम से न केवल खरीदारों का पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा, बल्कि प्रोजेक्ट हैंडओवर के समय रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन(RWA) को पैसे ट्रांसफर करने में होने वाली धोखाधड़ी पर भी लगाम लगेगी।
क्यों पड़ी नए नियमों की जरूरत?
यूपी रेरा के चेयरमैन संजय आर. भूसरेड्डी के अनुसार, इन नियमों का मुख्य मकसद पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन लाना है। होमबॉयर्स यह रकम कॉमन एरिया और सुविधाओं के लंबे समय तक रखरखाव के लिए जमा करते हैं। नए नियमों से फंड सुरक्षित रहेगा, सही जगह इन्वेस्ट होगा, सही समय पर ट्रांसफर होगा और हर साल इसका ऑडिट कराना अनिवार्य होगा।
UP RERA के नए IFMS नियमों की 7 बड़ी बातें
अलग बैंक खाते में जमा होगा पैसा: प्रमोटर/बिल्डर को रजिस्ट्री या सब-लीज डीड के समय ही IFMS फंड कलेक्ट करना होगा। इस पैसे को किसी अन्य मेंटेनेंस चार्ज या बिल्डर के पर्सनल अकाउंट के बजाय एक अलग समर्पित बैंक खाते में रखना अनिवार्य होगा।
सबसे ज्यादा ब्याज देने वाली FD में निवेश: जमा फंड को सुरक्षित रखने और उस पर ज्यादा रिटर्न पाने के लिए बिल्डरों को बैंकों से कोटेशन लेना होगा। इसके बाद, जो बैंक सबसे ज्यादा ब्याज दर ऑफर करेगा, उसी में एफडी करानी होगी।
RWA को हैंडओवर के समय पूरा फंड ट्रांसफर: प्रोजेक्ट के कॉमन एरिया का हैंडओवर देते समय बिल्डर को पूरा IFMS कॉर्पस RWA या एसोसिएशन ऑफ एलोटीज को ट्रांसफर करना होगा।
हिसाब का पूरा ऑडिट ट्रेल देना होगा: फंड ट्रांसफर करते समय बिल्डर को यूनिट-वाइज कलेक्शन, खर्च का ब्योरा, ऑडिट ट्रेल और फाइनल बैलेंस स्टेटमेंट RWA को सौंपना होगा।
केवल इन कामों में होगा पैसे का इस्तेमाल: IFMS फंड का इस्तेमाल सिर्फ सोसाइटियों के कॉमन एरिया, लिफ्ट, पार्क, जेनरेटर और शेयर्ड इक्विपमेंट्स की मरम्मत या रीप्लेसमेंट के लिए ही किया जा सकेगा।
RWA के लिए भी CA ऑडिट अनिवार्य: RWA को भी इस फंड का अलग से खाता मेंटेन करना होगा। चार्टर्ड एकाउंटेंट (CA) से ऑडिट कराने के बाद ऑडिट रिपोर्ट को 3 महीने के भीतर एजीएम में सदस्यों के सामने रखना होगा।
प्रोजेक्ट के हिसाब से तय की गईं IFMS की दरें
यूपी रेरा ने प्रोजेक्ट्स की कैटेगरी के हिसाब से IFMS की दरें भी तय कर दी हैं:
यूपी रेरा के इस 12वें संशोधन से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और लखनऊ में अपना आशियाना खरीदने वाले ग्राहकों को बड़ी राहत मिलेगी। अब बिल्डर मेंटेनेंस सिक्योरिटी के नाम पर जमा पैसे को दूसरे कामों में डाइवर्ट नहीं कर पाएंगे और प्रोजेक्ट हैंडओवर के वक्त आरडब्ल्यूए (RWA) को पाई-पाई का पारदर्शी हिसाब मिलेगा।