Dollar Vs Rupee: डॉलर के मुकाबले रुपया में भारी गिरावट आई है। बुधवार 7 अक्टूबर को डॉलर के मुकाबले रुपया 5 महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। रुपया 50 पैसे गिरकर 96.83 पर पहुंच गया है जो 20 मई, 2026 को बने 96.96/$ के हालिया रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब है। बता दें कि मंगलवार (6 अक्टूबर) को यह करेंसी 96.35/$ पर बंद हुई थी।
मजबूत डॉलर, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी फंड की निकासी के दबाव के कारण, इस साल अब तक रुपया लगभग 8% गिर चुका है। इस वजह से यह सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली एशियाई करेंसी बन गई है।
रुपये में कमजोरी तब आई जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बुधवार (6 अक्टूबर) को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करके इसे 5.50% कर दिया। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बार रेट में बढ़ोतरी थी। मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने भी अपना रुख 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर लिया, जिससे सख्त पॉलिसी अप्रोच का संकेत मिलता है।
रुपये की वैल्यूएशन पर RBI गवर्नर
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि शॉर्ट टर्म में फाइनेंशियल मार्केट तर्कहीन हो सकते हैं, जबकि रुपये की वैल्यू के कई पैमाने बताते हैं कि करेंसी की वैल्यू कम आंकी गई हो सकती है।
मल्होत्रा ने पॉलिसी के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "लंबे समय में ही सही वैल्यू का पता चल पाता है।"
उन्होंने कहा कि कई अनुमानों के अनुसार, जिसमें रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (REER) भी शामिल है, रुपये की वैल्यू "ज़रूरत से ज़्यादा नहीं आंकी गई है" और हो सकता है कि इसकी वैल्यू कम आंकी गई हो।
रुपये पर क्या डाल रहा दबाव
डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले डॉलर की वैल्यू मापता है, 0.25% बढ़कर 102.09 पर ट्रेड कर रहा था, जिससे उभरते बाजारों की करेंसी पर दबाव बढ़ रहा है।
भारत के मुख्य इंपोर्ट कमोडिटी, ब्रेंट क्रूड की कीमत भी 0.97% बढ़कर $101.56 प्रति बैरल हो गई। क्रूड की ऊंची कीमतें डॉलर की मांग बढ़ाकर भारत के इंपोर्ट बिल और रुपये पर दबाव डाल सकती हैं।
एक्सचेंज डेटा के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भी बिकवाली करते रहे और मंगलवार को नेट आधार पर ₹2,961.30 करोड़ के भारतीय शेयर बेचे।
RBI की रेट बढ़ोतरी और रुपये का आउटलुक
DBS बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राधिका राव ने कहा कि RBI की रेट बढ़ोतरी से साइक्लिकल महंगाई के बढ़ते जोखिम का पता चलता है, जबकि रुख में बदलाव और ग्रोथ व महंगाई के अनुमानों में बढ़ोतरी से सख्त पॉलिसी अप्रोच का संकेत मिलता है।
राव के अनुसार, पॉलिसी में यह बदलाव रुपये के लिए "थोड़ा सकारात्मक" हो सकता है क्योंकि ब्याज दरों में बड़ा अंतर और टाइटनिंग का रुख बाहरी झटकों के खिलाफ इसकी मजबूती को बेहतर बना सकता है, हालांकि मजबूत अमेरिकी डॉलर अभी भी एक चुनौती बना हुआ है। इसलिए, बुधवार को रुपये में आई यह हलचल RBI के सख्त पॉलिसी रुख के बावजूद हुई है, जबकि डॉलर, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेश जैसे ग्लोबल कारक इस करेंसी पर असर डाल रहे हैं।
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