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Crude Oil: टूटने जा रहा 5 साल का रिकॉर्ड, कीमतें लगातार 7वें सप्ताह गिरावट की ओर

रिकॉर्ड उच्च अमेरिकी उत्पादन, चीन की ओर से कच्चे तेल का इंपोर्ट सुस्त पड़ना और तेल उत्पादन में कटौती को लेकर ओपेक+ की ओर से सपोर्ट की कमजोर स्थिति से तेल की कीमतों को झटका लगा। लेकिन सऊदी अरब और रूस की ओर से ओपेक+ राष्ट्रों से कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती में शामिल होने की अपील किए जाने पर तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी लौटी

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Dec 09, 2023 पर 8:18 AM
Crude Oil: टूटने जा रहा 5 साल का रिकॉर्ड, कीमतें लगातार 7वें सप्ताह गिरावट की ओर
सप्ताह खत्म होते-होते तेल की कीमत फिर से बढ़ी।

कच्चे तेल की कीमत (Crude Oil Price) के मामले में पिछले 5 साल का रिकॉर्ड, टूटने की कगार पर है। दरअसल पिछले 5 वर्षों में पहली बार तेल की कीमतें लगातार 7वें सप्ताह गिरावट की ओर हैं। हालांकि सप्ताह खत्म होते-होते तेल की कीमत फिर से बढ़ी है। इसके पीछे वजह रही सऊदी अरब और रूस की ओर से ओपेक+ सदस्य राष्ट्रों से कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती में शामिल होने की अपील। रॉयटर्स की रिपोर्ट कें मुताबिक, ब्रेंट क्रूड वायदा 1.46 डॉलर या 2% बढ़कर 75.51 डॉलर प्रति बैरल पर, जबकि यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड वायदा 1.33 डॉलर या 1.9% बढ़कर 70.67 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है।

इससे पहले ब्रेंट में 2 डॉलर की तेजी आई थी। दोनों बेंचमार्क क्रूड, इससे पहले के सेशन में जून के अंत के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर आ गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड वायदा इस सप्ताह क्रमशः 4.4% और 4.7% की गिरावट की ओर हैं, जो पिछले 5 सप्ताह में उनकी सबसे बड़ी गिरावट है।

उत्पादन में होगी 22 लाख बैरल प्रति दिन की कटौती

रिकॉर्ड उच्च अमेरिकी उत्पादन, चीन की ओर से कच्चे तेल का इंपोर्ट सुस्त पड़ना और तेल उत्पादन में कटौती को लेकर ओपेक+ की ओर से सपोर्ट की कमजोर स्थिति से तेल की कीमतों को झटका लगा।दुनिया के दो सबसे बड़े ऑयल एक्सपोर्टर सऊदी अरब और रूस ने गुरुवार को सभी ओपेक+ सदस्य राष्ट्रों से वैश्विक अर्थव्यवस्था की भलाई के लिए कच्चे तेल उत्पादन में कटौती पर एक समझौते में शामिल होने की अपील की। इसके बाद पेट्रोलियम एक्सपोर्टर देशों और सहयोगियों का संगठन 'ओपेक+' अगले साल की पहली तिमाही के लिए तेल उत्पादन में संयुक्त 22 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) की कटौती पर सहमत हुआ। इससे कीमतों में तेजी फिर लौटी।

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