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Crude Oil Price : कच्चे तेल की कोई कमी नहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मूज बंद होने पर दूसरे रास्तों से होगी क्रूड की सप्लाई

Crude Oil Price : पेट्रोलियम मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्रालय और शिपिंग मंत्रालय ये चारों मिल कर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और सप्लाई में आने वाली किसी दिक्कत से निपटने के लिए रणनीति बना रहे हैं। अभी तक के असेसमेंट के बाद ये कहा गया है कि अभी फिलहाल हमें कोई कमी नहीं होने वाली है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के पास 3 हफ्ते का स्टॉक है

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Jun 23, 2025 पर 11:27 AM
Crude Oil Price : कच्चे तेल की कोई कमी नहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मूज बंद होने पर दूसरे रास्तों से होगी क्रूड की सप्लाई
Strait of Hormuz : स्ट्रेट ऑफ होर्मूज , ओमान और ईरान के बीच स्थित है तथा उत्तर में मध्यपूर्व की खाड़ी को दक्षिण में ओमान की खाड़ी और उसके आगे अरब सागर से जोड़ता है

Crude Supply : स्ट्रेट ऑफ होर्मूज बंद करने को ईरान के संसद से मंजूरी मिली दी है। इससे क्रूड सप्लाई में कमी की आशंका जताई जा रही है। वहीं पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी ने कहा है कि कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है। इस पर ज्यादा जानकारी देते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के लक्ष्मण रॉय ने बताया कि ईरान-इजरायल के जंग पर सरकार की नजर है। कच्चे तेल की कोई कमी नहीं हो इस पर लगातार 2 हफ्ते से सरकार नजर बनाए हुए है। सरकार का कच्चे तेल की सप्लाई सुचारू बनाए रखने पर जोर है। सरकार का अन्य रास्ते से क्रूड सप्लाई बढ़ाने पर जोर है।

पेट्रोलियम मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्रालय और शिपिंग मंत्रालय ये चारों मिल कर क्रूड ऑयल की कीमतों पर नजर रखे हुए हैं और सप्लाई में आने वाली किसी दिक्कत से निपटने के लिए रणनीति बना रहे हैं। अभी तक के असेसमेंट के बाद ये कहा गया है कि अभी फिलहाल हमें कोई कमी नहीं होने वाली है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के पास 3 हफ्ते का स्टॉक है। रही बात ये कि अगर स्टेट ऑफ होर्मूज बंद हो जाता है तब क्या होगा तो ये भी जान लें कि देश में रोजाना 5.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल की खपत होती है। इस में 1.5 से 2 मिलियन बैरल की सप्लाई स्टेट ऑफ होर्मूज से होती है। अब सरकार की रणनीति है कि अगर अब स्टेट ऑफ होर्मूज बंद होता है तो दूसरे रास्तों से तेल लाने के तरीके तलाशे जायें। ऐसे में अब रशिया, अमेरिका और ब्राजील से अभी से संपर्क करना शुरू कर दिया गया है। अब इन देशों से तेल लेने की कोशिश की जाएगी।

सरकार कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ाने के साथ ही इसके फ्रेट चार्जेज में बढ़त न हो इस पर भी फोकस कर रही है। इसके लिए शिपिंग मंत्रालय, शिपिंग कंपनियों से सलाह मशविरा कर रही है। दूसरी बात ये है कि इस तरह के मुश्किल हालात में इश्योरेंस पर होने वाला खर्चा बढ़ जाता है। ऐसे में इश्योरेंस प्रीमियम बहुत ज्यादा न बढ़े इस पर भी रणनीति बनाई जा रही है।

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