मॉनसून में देरी और देश के सभी हिस्से में पर्याप्त बारिश नहीं होने की वजह से चावल और दलहन की बुआई में कमी देखने को मिली है, जिन्हें प्रमुख खरीफ फसल माना जाता है। सात जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार खरीफ फसलों की बुआई का रकवा पिछले साल की तुलना में 8.7 पर्सेंट कम है।
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार चावल की बुआई के कुल रकवे मे 23.9 पर्सेंट की गिरावट हुई है, जबकि दलहन की बुआई पिछले साल के मुकाबले 25.8 पर्सेंट कम जमीन पर हुई है। दलहन की एक प्रमुख फसल अरहर की बुआई में काफी कमी देखने को मिली है। पिछले साल के मुकाबले इस साल 60 पर्सेंट कम रकबे में अरहर की बुआई हुई है। मांग को पूरा करने के लिए अरहर का इंपोर्ट किया जा रहा है और इसकी बुआई में गिरावट चिंता का विषय है।
मोती लाल ओसवाल की रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में कम बारिश का ज्यादा असर नहीं होगा, क्योंकि यहां अपेक्षाकृत ज्यादा जमीन पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। बार्कलेज (Barclays) में ईएम एशिया इकनॉमिक ( EM Asia Economic) के मैनेजिंग डायरेक्टर और हेड राहुल बाजोरिया ने मनीकंट्रोल (Moneycontrol) को बताया, 'धान और दलहन की कम बुआई चिंता का विषय है। हालांकि, इसके ठीक-ठीक असर के बारे में कुछ कहना अभी जल्दबाजी होगी। ज्यादातर बुआई जुलाई से अगस्त के दूसरे हफ्ते के दौरान होती है। इसलिए कम बुआई के असर के बारे में कुछ कहना अभी जल्दबाजी होगी।'
मौसम विभाग के मुताबिक पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में जहां जोरदार बारिश हुई है, वहीं मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, दिल्ली औऱ उत्तर प्रदेश में सामान्य बारिश हुई है।
बारिश के पानी के स्टोरज की बात की जाए,तो नॉर्दर्न रीजन में स्थित बेहतर है। सेंट्रल वॉटर कमीशन (सीडब्ल्यूसी) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 6 जुलाई को स्टोरेज लेवल कुल क्षमता का 29 पर्सेंट है। 146 जलाशयों में लाइव स्टोरेज पिछले साल का 96 पर्सेंट है। नॉर्दर्न रीजन में स्टोरज लेवल इस साल 45 पर्सेंट है, जबकि सदर्न रीजन में इसके मुकबले काफी कम यानी 20 पर्सेंट है। सेंट्रल, ईस्टर्न और वेस्टर्न रीजन में यह आंकड़ा क्रमशः 35 पर्सेंट, 28 पर्सेंट और 20 पर्सेंट है।