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कई राज्यों में मॉनसून में देरी से धान और दलहन की बुआई में गिरावट

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार चावल की बुआई के कुल रकवे में 23.9 पर्सेंट की गिरावट हुई है, जबकि दलहन की बुआई पिछले साल के मुकाबले 25.8 पर्सेंट कम जमीन पर हुई है। दलहन की एक प्रमुख फसल अरहर की बुआई में काफी कमी देखने को मिली है। पिछले साल के मुकाबले इस साल 60 पर्सेंट कम रकबे में अरहर की बुआई हुई है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 11, 2023 पर 9:22 PM
कई राज्यों में मॉनसून में देरी से धान और दलहन की बुआई में गिरावट
ज्यादातर बुआई जुलाई की शुरुआत से लेकर अगस्त के दूसरे हफ्ते के दौरान होती है।

मॉनसून में देरी और देश के सभी हिस्से में पर्याप्त बारिश नहीं होने की वजह से चावल और दलहन की बुआई में कमी देखने को मिली है, जिन्हें प्रमुख खरीफ फसल माना जाता है। सात जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार खरीफ फसलों की बुआई का रकवा पिछले साल की तुलना में 8.7 पर्सेंट कम है।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार चावल की बुआई के कुल रकवे मे 23.9 पर्सेंट की गिरावट हुई है, जबकि दलहन की बुआई पिछले साल के मुकाबले 25.8 पर्सेंट कम जमीन पर हुई है। दलहन की एक प्रमुख फसल अरहर की बुआई में काफी कमी देखने को मिली है। पिछले साल के मुकाबले इस साल 60 पर्सेंट कम रकबे में अरहर की बुआई हुई है। मांग को पूरा करने के लिए अरहर का इंपोर्ट किया जा रहा है और इसकी बुआई में गिरावट चिंता का विषय है।

कम बारिश

इन फसलों की कम बुआई होने की मुख्य वजह देश के अलग-अलग हिस्सों में एक जैसी बारिश का नहीं होना है। चावल और दाल उत्पादक कई राज्यों में कम बारिश हुई है। चावल उत्पादक प्रमुख राज्यों, जैसे कि पश्चिम बंगाल (सामान्य से 11 पर्सेंट कम ), आंध्र प्रदेश (सामान्य से 22 पर्सेंट कम), ओडिशा (सामान्य से 25 पर्सेंट कम), तेलंगाना (सामान्य से 35 पर्सेंट कम), छत्तीसगढ़ (सामान्य से 12 पर्सेंट कम बारिश), बिहार (सामान्य से 29 पर्सेंट कम) और असम (सामान्य से 2 पर्सेंट कम) में बारिश कम होने से चावल की बुआई पर प्रतिकूल असर हुआ है।

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