कच्चे हीरे की सप्लाई में कमी से हीरा उद्योग परेशान

सोना, चांदी के बाद अब हीरा भी अच्छा खासा महंगा होने के आसार हैं।

अपडेटेड Nov 02, 2022 पर 2:15 PM
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गहनों के लिए अब और रकम खर्च करनी होगी। सोना, चांदी के बाद अब हीरा भी अच्छा खासा महंगा होने के आसार हैं। दरअसल कच्चे हीरे के दाम 25 फीसदी तक महंगे होंगे और इसी बात से डायमंड इंडस्ट्री चिंतित है। जिंबाब्वे के खदानों से निकलने वाले कच्चे हीरे से थोड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन अभी तक ये अंतरराष्ट्रीय बाजार में नहीं बिकता है। इस पर फैसला वर्ल्ड डायमंड काउंसिल की बैठक में इसी हफ्ते होने की उम्मीद है।

कच्चे हीरे की सप्लाई में कमी से हीरे के भाव पिछले 6 महीने में ही 35 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। अब तक जिन खदानों से हीरा निकाला जाता था वहां से ज्यादातर हीरे निकल चुके हैं। लेकिन जिम्बाब्वे अब भी ऐसा देश है जहां कच्चे हीरे का भंडार छुपा है। अंदाजा है कि जिम्बाब्वे की खदानों से सालाना 15 लाख कैरेट हीरा मिल सकता है। लेकिन वर्ल्ड डायमंड काउंसिल की पाबंदी से जिम्बाब्वे का हीरा दूसरे देश नहीं खरीद सकते हैं। अब ये पाबंदी दूर करने की मांग की जा रही है।

हीरा उद्योग में अवैध कारोबार को रोकने के लिए किंबर्ली सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया जरूरी है। वर्ल्ड डायमंड काउंसिल ने अब तक जिम्बाब्वे के खदानों से निकले हीरों को किंबर्ली सर्टिफिकेट जारी नहीं किया है। अब इस मसले पर इसी हफ्ते वर्ल्ड डायमंड काउंसिल की दुबई बैठक में चर्चा होगी।

कच्चे हीरे की दुनियाभर के बाजारों में सालाना 80-85 मिलियन कैरेट की मांग है। अगर जिंबाब्वे से हीरा खरीद की इजाजत मिलती है तो कच्चे हीरे की कमी काफी हद तक दूर हो सकती है।


18 अप्रैल 2011

सीएनबीसी आवाज़

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