Edible Oil : पश्चिम एशिया में हो रही लड़ाई का असर खाद्य तेल की कीमतों में भी दिखाई दे रहा है। पिछले 1 हफ्ते में कीमतों में 3-5 रुपये प्रति किलो का उछाल देखने को मिला है। अगर यह लड़ाई लंबी खिंचती है तो कीमतों में 10 से लेकर 15 रुपये किलो की बढ़ोतरी हो सकती है
पश्चिम एशिया में हो रही लड़ाई आपके किचन का बजट बिगाड़ सकती है। भारत अपनी जरूरत का 60 परसेंट खाद्य तेल आयात करता है। हालांकि वेस्ट एशिया के जरिए थोड़ी मात्रा में ही तेल का आयात होता है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खाद्य तेल की कीमतों में बढोतरी देखने को मिल रही है। सोयाबीन के साथ साथ पाम ऑयल की कीमतों में अचानक से बढ़ी है। सनफ्लावर, सरसों और मूंगफली के तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है । लिहाजा घरेलू बाजार में कीमतों में भी उछाल देखने को मिल रहा है।
2 खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों के पीछे रुपये में आई कमजोरी भी एक बड़ा कारण है। पिछले 6 महीने में रुपये में करीब 5 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली है। इससे खाद्य तेल का आयात महंगा हो गया है। अगर वार लंबी खिंचती है और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिलती है तो खाने पीने का बाकी सामान भी महंगा हो सकता है।
बीते एक हफ्ते में कई प्रमुख खाद्य तेलों के दाम बढ़े हैं। पाम ऑयल की कीमत एक हफ्ते पहले 134 रुपये प्रति किलो थी जो अब बढ़कर करीब 139 रुपये हो गई है। वहीं सोयाबीन ऑयल 148 रुपये से बढ़कर लगभग 150 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। सनफ्लावर ऑयल की कीमत 172 रुपये से बढ़कर 175 रुपये प्रति किलो हो गई है।
घरेलू तेलों की बात करें तो सरसों के तेल में भी मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसकी कीमत 185 रुपये से बढ़कर करीब 186 रुपये प्रति किलो हो गई है। वहीं मूंगफली के तेल की कीमत 191 रुपये से बढ़कर लगभग 194 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
बता दें कि युद्ध की स्थिति के कारण, संबंधित देशों से बंदरगाह यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही विशेष रूप से प्रभावित हुई है। यह मार्ग विश्व के तेल आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अहम भूमिका निभाने वाले इस मार्ग पर तनाव बढ़ने से जहाजों की आवाजाही में देरी हो रही है। कुछ जहाज ईरान क्षेत्र के आसपास भी रुक गए हैं। ऐसी स्थिति में, आपूर्ति व्यवस्था बाधित हो गई है। जहाजों को केप ऑफ गुड होप जैसे वैकल्पिक मार्गों की ओर मुड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। यह मार्ग बहुत लंबा है, जिससे यात्रा का समय बढ़ जाता है। ईंधन और परिवहन लागत भी बढ़ रही है। इन अतिरिक्त लागतों के कारण आयात कीमतें बढ़ रही हैं ।