ExxonMobil ने क्रूड 160 डॉलर तक जाने की जताई आशंका, तेजी से घट रहा अमेरिकी ऑयल रिजर्व

अमेरिका में क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का रिजर्व गिरकर 22 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इस वजह से दुनिया की कुछ बड़ी ऑयल कंपनियों ने क्रूड की कीमतों में उछाल का अनुमान जताया है। पहले से ही ब्रेंट क्रूड का भाव हाई लेवल पर बना हुआ है

अपडेटेड Jun 06, 2026 पर 3:30 PM
फ्यूल की कीमतों में इजाफा से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

आने वाले दिनों में ऑयल संकट और गहरा सकता है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका में क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का रिजर्व गिरकर 22 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इस वजह से  दुनिया की कुछ बड़ी ऑयल कंपनियों ने क्रूड की कीमतों में उछाल का अनुमान जताया है। पहले से ही ब्रेंट क्रूड का भाव हाई लेवल पर बना हुआ है। इसके चलते भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ाने को मजबूर हुई हैं।

तेजी से घट रहा है ऑयल का ग्लोबल इनवेंट्री

ExxonMobil के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नील चैपमैन ने कहा है कि ग्लोबल इनवेंट्री काफी लो लेवल की तरफ बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अगर आने वाले दिनों में सप्लाई नहीं बढ़ती है तो ब्रेंट क्रूड का भाव 150-160 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। उनका मानना है कि सप्लाई में कमी के बीच मार्केट अनिश्चित समय तक इनवेंट्री पर निर्भर नहीं रह सकता। कई दूसरे एग्जिक्यूटिव्स का भी मानना है कि इमर्जेंसी रिजर्व और कमर्शियल स्टॉक ने अचानक लगे झटकों से बचाया है। लेकिन, अब रिजर्व तेजी से घट रहा है।


रिफाइंड प्रोडक्ट्स की सप्लाई में भी दिक्कत की आशंका

Chevron के चेयरमैन और सीईओ माइक विर्थ का भी मानना है कि जियोपॉलिटिकल डिसरप्शन जारी रहने पर ऑयल की कीमतें काफी ऊपर जा सकती हैं। एनालिस्ट्स का कहना है कि रिस्क सिर्फ क्रूड की सप्लाई को लेकर नहीं है। डीजल, पेट्रोल और एटीएफ जैसे रिफाइंड प्रोडक्ट्स के मामले में भी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। क्रूड ऑयल के प्रोडक्शन को कुछ स्थितियों में जल्द बढ़ाया जा सकता है। लेकिन, रिफाइंड फ्यूल की इनवेंट्री रिफानरी कपैसिटी पर निर्भर है।

मध्यपूर्व में लड़ाई की वजह से क्रूड में उछाल

अमेरिका-ईरान में लड़ाई शुरू होने से पहले क्रूड की कीमतें 72 डॉलर प्रति बैरल थी। उसके बाद कीमतों में तेज उछाल आया। एक समय तो कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। उसके बाद इसमें नरमी आई। फिर भी अप्रैल में ज्यादातर समय ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा। हालांकि, अभी ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर से नीचे चल रहा है। लेकिन, यह कीमत भी भारत जैसे देशों के लिए मुसीबत पैदा कर सकता है।

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ऑयल कंपनियां बढ़ा चुकी हैं पेट्रोल-डीजल, गैस की कीमतें

क्रूड की कीमतों में उछाल से भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल की कीमतों में कई बार इजाफा कर चुकी हैं। अगर क्रूड की कीमतें 100 डॉलर के पार जाती हैं तो इससे भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें कंपनियां और बढ़ा सकती हैं। इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा। पहले से ही महंगे फ्यूल की वजह से कई परिवार दिक्कत का सामना कर रहे हैं। फ्यूल की कीमतों में इजाफा से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। आरबीआई ने 5 जून की मॉनेटरी पॉलिसी में इनफ्लेशन का अपना अनुमान बढ़ा दिया है।

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