Gold Prices: भारत में अंतरराष्ट्रीय बाजार से 18% महंगा है सोना, ये 2 बड़े कारण हैं जिम्मेदार
Gold Prices: भारत में सोना आखिर दुनिया के मुकाबले इतना महंगा क्यों बिक रहा है? 2026 में घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में करीब 18 प्रतिशत की तेजी आई, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार लगभग स्थिर रहा। इसके पीछे दो बड़े कारण जिम्मेदार हैं। जानिए डिटेल।
2026 में अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 7 प्रतिशत कमजोर हुआ है।
Gold Prices: 2026 में भारत में सोने की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार के दामों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है। इस साल भारत में सोना करीब 18 प्रतिशत महंगा हुआ, जबकि डॉलर में सोने की कीमत लगभग स्थिर रही। इसके पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला, सरकार का आयात शुल्क बढ़ाना और दूसरा, रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना।
आंकड़े क्या बताते हैं?
2026 की शुरुआत में MCX पर 24 कैरेट सोने का भाव 1,32,614 रुपये प्रति 10 ग्राम था। 27 मई तक यह बढ़कर 1,56,229 रुपये पहुंच गया। यानी करीब 23,615 रुपये की तेजी आई। दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के हिसाब से सोना सिर्फ 1.6 प्रतिशत बढ़ा।
Augmont की रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी के मुताबिक, घरेलू बाजार में करीब 18 प्रतिशत की तेजी का सबसे बड़ा कारण आयात शुल्क में बढ़ोतरी और रुपये की कमजोरी है।
आयात शुल्क बढ़ने का असर
सरकार ने सोने पर प्रभावी आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया। इसमें 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 प्रतिशत AIDC शामिल है। इसका सीधा असर यह हुआ कि आयातकों के लिए सोना काफी महंगा हो गया और इसकी लागत ग्राहकों तक पहुंचा दी गई।
13 मई के बाद सोने की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। इससे पहले सोना करीब 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था, लेकिन शुल्क बढ़ने के बाद कीमत 1.6 लाख रुपये तक पहुंच गई।
सरकार ने एक्सपोर्ट से जुड़े एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत सोने के आयात नियम भी सख्त किए हैं। इससे लंबे समय में सप्लाई पर असर पड़ सकता है और कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
रुपये की कमजोरी ने बढ़ाया असर
2026 में अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 7 प्रतिशत कमजोर हुआ है। चूंकि दुनिया में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए रुपया कमजोर होने का मतलब है कि भारतीय ग्राहकों को वही सोना खरीदने के लिए ज्यादा रुपये चुकाने पड़ते हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और बढ़ता है और रुपया और कमजोर होता है, तो भारत में कीमतें और तेजी से बढ़ सकती हैं। वहीं अगर वैश्विक बाजार में कीमतें कुछ गिरती भी हैं, तब भी कमजोर रुपये की वजह से घरेलू बाजार में राहत सीमित रह सकती है।
भारत में सोने की कीमत तय कैसे होती है?
भारत में सोने की कीमत मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव पर आधारित होती है, खासकर LBMA Gold Price पर। इसके ऊपर आयात शुल्क और रुपये-डॉलर की चाल जुड़ जाती है। यानी भारत में सोने का अंतिम भाव ग्लोबल प्राइस, टैक्स और करेंसी के हिसाब से तय होता है।
क्या यह अंतर आगे भी बना रहेगा?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल यह अंतर जल्दी खत्म होता नहीं दिख रहा। 2012 के बाद सरकार कई बार सोने पर आयात शुल्क बढ़ा चुकी है, जबकि कटौती सिर्फ दो बार हुई है।
अगर आयात शुल्क में बड़ी कटौती होती है तभी भारत और वैश्विक बाजार के दामों का अंतर कम हो सकता है। डॉ. चैनानी का कहना है कि जब तक 15 प्रतिशत आयात शुल्क लागू रहेगा और पुराने स्टॉक खत्म नहीं होंगे, तब तक घरेलू बाजार में सोना अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुकाबले प्रीमियम पर बना रहेगा।
फिर भी बाजार में डिस्काउंट क्यों दिख रहा?
दिलचस्प बात यह है कि फिलहाल भारतीय बाजार में सोना 'लैंडेड प्राइस' के मुकाबले डिस्काउंट पर चल रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, आयात शुल्क बढ़ने के बाद कई निवेशकों और ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई।
इसके अलावा बुलियन डीलर्स ने पुराने कम टैक्स वाले स्टॉक भी बाजार में उतार दिए। इसी वजह से बाजार में अस्थायी दबाव बना और डिस्काउंट बढ़ गया।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह डिस्काउंट स्थायी नहीं है। असली तस्वीर यही है कि भारत में सोना संरचनात्मक रूप से महंगा बना हुआ है। जब तक आयात शुल्क ऊंचा रहेगा और रुपया कमजोर रहेगा, तब तक घरेलू बाजार में सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से ज्यादा बनी रह सकती हैं।
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