VINAYAK SAVANUR,Sukhanidhi Investment Advisors

VINAYAK SAVANUR,Sukhanidhi Investment Advisors
अक्षय तृतीया और सोने के बीच है गहरा संबंध
अक्षय तृतीया पर सोने की खरीद की एक बहुत ही पुरानी परंपरा है। अक्षय तृतीया की पावन तिथि को सोने की खरीदारी को शुभ माना जाता है। इस दिन सोने की खरीद घर में लक्ष्मी का स्वागत करने जैसा माना जाता है। सोने की भारी कीमत और इसके साथ जुड़े दूसरे जोखिमों के बावजूद सोने में खरीदारी का जुनून जैसा दिखता है। गोल्ड के पीछे के इस जुनून की वजह तमाम मार्केटिंग एजेंसियां और उनकी मार्केटिंग रणनीति भी है जो गोल्ड को घर में लक्ष्मी लाने के एक मात्र तरीके के तौर पर पेश करती हैं।
भारत के सोने का जुनून इस कदर हावी है कि इसको लगभग एक धर्म की तरह पूजा जाता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अजय मित्रा ने एक बार कहा था कि अगर भारत छींकता है तो गोल्ड इंडस्ट्री को जुकाम हो जाता है। हम इस बात से तो सहमत है कि सोने की खरीद एक शौक नहीं बल्कि एक निवेश भी है। इससे वित्तीय सुरक्षा भी मिलती है। लेकिन हम यह मानने को तैयार नहीं है कि यह समृद्धि और वेल्थ क्रिएशन का सबसे बेहतर तरीका है। आइये यहां हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि कैसे हर चमकती चीज सोना ही नहीं होती।
फिजिकल गोल्ड में निवेश से बचें
हमारी फिजिकल गोल्ड में निवेश न करने की सलाह है। इसकी पहली वजह तो ये है कि इस पर मेकिंग चार्ज लगता है जो एक तरह का वेस्टेज है। इसको ज्वेलरी की अंतिम कीमत में जोड़ दिया जाता है। इसके अलावा फिजिकल गोल्ड पर 3 फीसदी की दर से GST भी लागू होता है। यह भी ध्यान रखें कि गोल्ड ज्वेलरी की डिजाइन जितनी जटिल होगी, मेकिंग चार्ज उतना ही ज्यादा होता है।
इसके अलावा लॉकर में गोल्ड रखने पर बैंक आप से 12,00 रुपये से लेकर 22,000 रुपये तक का एडवांस एनुअल रेंटल फी लेते हैं। इसमें GST शामिल नहीं है। इसके अलावा जब भी ज्वैलरी की जरूरत होती है, आपको बैंक तक जाना होता है जो आपके गोल्ड की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है।
तीसरा तर्क ये है कि घर या लॉकर में पड़े गोल्ड पर आपको कोई इनकम (पैसिव इनकम) नहीं होती है। वॉरेन बफेट समेत कई वित्तीय जानकारों का कहना है कि किसी भी निवेश में रेवेन्यू जरूर मिलना चाहिए। सोना इस मानक पर खरा नहीं उतरता है। जब तक यह आपके पास पड़ा रहता है तब तक इसमें कोई आय नहीं होती है। वहीं दूसरी तरफ इक्विटी में आपको डेविडेंड के तौर पर कमाई होती रहती है।
इसके अलावा दूसरे निवेश के विकल्पों की तुलना में गोल्ड कम लिक्विड होता है। वहीं, गोल्ड ज्वेलरी का भावनात्मक मूल्य इसके आर्थिक मूल्य से ज्यादा होता है। ऐसे में सोना बेचने का निर्णय लेना आसान नहीं होता है। जब आप इसे बेचने का निर्णय लेते भी हैं तो इसे बेचना इतना आसान नहीं होता।
सोना इंटरनेशनल बाजार पर बहुत ज्यादा निर्भर होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भरता की वजह से इसके भाव में बहुत तेजी से उतार-चढ़ाव होता है। गोल्ड की कीमत में निर्धारण यूएस डॉलर का बहुत महत्व होता है। इसके अलावा सोने के भाव के निर्धारण में मांग और आपूर्ति, महंगाई, ब्याज दर की अहम भूमिका होती है।
सोने पर कर (टैक्स) की स्थिति पर ध्यान दें तो 3 साल रखने के बाद बेचे जाने वाले गोल्ड को लॉन्ग टर्म निवेश समझा जाता है। इस पर 20 फीसदी की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है। वहीं शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन को आपकी इनकम में ही जोड़ दिया जाता है। फिर उस पर आपके टैक्स ब्रैकेट के हिसाब से टैक्स लागू होता है।
जानिए सोने के निवेश की तुलना में इक्विटी निवेश बेहतर क्यों?
क्वालिटी इक्विटी पोर्टफोलियो में सोने के ऊपर बताए गए कोई भी दोष नहीं होते। कोरोना महामारी काल में पूरी दुनिया की इकोनॉमी में तमाम निवेशक क्वालिटी आधारित इनवेस्टमेंट पर विचार कर रहे हैं। हमको अपने लिए एक क्वालिटी पोर्टफोलियो बनाते वक्त उन कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिनका मैनेजमेंट मजबूत और विश्वसनीय हो। जिसकी बैलेंस सीट मजबूत हो। इस तरह की कंपनियों के चुनाव के लिए हमें उन कंपनियों पर ही ध्यान देना चाहिए जिनकी मार्केट कैप 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो और जो कम से कम 10 साल से कारोबार कर रही हों। इनका प्रॉफिट मार्जिन कम से कम 10 फीसदी और रिटर्न ऑन कैपिटल इम्प्लॉयड ( (ROCE)पिछले 10 साल में कम से कम 14 फीसदी होनी चाहिए। बता दें कि क्वालिटी पोर्टफोलियो काफी कम वोलेटाइल होता है। किसी गिरावट की स्थिति में इसमें बेहतर सुरक्षा मिलती है। लॉन्ग टर्म में इनमें जोखिम भी काफी कम होता है। लंबी अवधि में आपको अच्छा रिटर्न भी मिलता है।
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