6 साल की सबसे बड़ी सालाना गिरावट के बाद, 2022 में भी सोने ने की सुस्त शुरुआत

ग्लोबल मार्केट में भी गोल्ड की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। निवेशक कोविड -19 के ओमीक्रोन वैरिएंट के असर का अंदाजा लगाते नजर आ रहे हैं।

अपडेटेड Jan 03, 2022 पर 6:33 PM
जैसे - जैसे ब्याज दरों में बढ़ोतरी नजर आएगी। वैसे-वैसे सोने पर दबाव बढ़ता नजर आएगा। 2022 मे सोने की दशा और दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि ब्याज दरों की स्थिति क्या रहती है। महंगाई किस स्तर पर रहती है और कोरोना के नए वैरिएंट से निपटने के लिए दुनिया की सरकारें कितनी कामयाब रहती है।

2022 में पहले कारोबारी दिन सोने की कीमतों में भारी उठापटक देखने को मिली। वहीं चांदी में गिरावट देखने को मिली। एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर 0.04 फीसदी की गिरावट के साथ 48,082 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दिख रहा है। वहीं चांदी 0.3 फीसदी गिरकर 62,480 प्रति किलो पर नजर आ रही है।

ग्लोबल मार्केट में भी गोल्ड की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। निवेशक कोविड -19 के ओमीक्रोन वैरिएंट के असर का अंदाजा लगाते नजर आ रहे हैं। इस बीच इस हफ्ते के अंत में आनेवाले अमेरिकी जॉब डेटा पर भी नजर गड़ाए हुए है।

मंगलवार को हाजिर बाजार में सोना 0.3 फीसदी गिरकर 1,823 डॉलर प्रति औंस तक चला गया। वहीं हाजिर बाजार में चांदी 23.27 डॉलर प्रति औंस पर सपाट नजर आई जबकि प्लेटिनम 1.76 फीसदी की बढ़त के साथ 979 डॉलर पर नजर आ रहा है।


Geojit Financial Services ने अपने एक नोट में कहा है कि जब तक सोना 1820 डॉलर के ऊपर बना रहता है तब तक इसमें हल्के पॉजिटीव रुझान के साथ कारोबार होता नजर आएगा। हालांकि अगर सोना 1790 डॉलर के नीचे फिसलता है तो फिर इसमें और कमजोरी आएगी। वहीं सिल्वर अगर 21.20 डॉलर के अपने सपोर्ट के नीचे जाता है तो शॉर्ट टर्म में इसमें और गिरावट आएगी।

गौरतलब है कि 2021 में सोने में ग्लोबल मार्केट में 3.6 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है जो 2015 के बाद की इसकी सबसे बड़ी सालाना गिरावट है। सेंट्रल बैंक धीरे-धीरे कोरोना महामारी के दौरान उठाए गए राहत के कदमों को अब महंगाई से निपटने के लिए पीछे खींचते नजर आ रहे हैं जिसका असर सोने की कीमतों पर देखने को मिल रहा है।

कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी के बावजूद ओमीक्रोन वैरिएंट के कारण होने वाली मौतों और हॉस्पिटलाइजेशन की संख्या तुलनात्मक तौर पर कम है जिसकी वजह से दुनिया के तमाम देशों में व्यापक लॉकडाउन जैसे कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

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Millwood Kane International के निश भट्ट का कहना है कि 2 सालों के शानदार रिटर्न के बाद साल 2021 में सोने ने दूसरे एसेट क्लास की तुलना मे कमजोर प्रदर्शन किया है। कोविड -19 से जुड़ी परेशानियों के चलते 2020 में सोने ने ऑलटाईम हाई छुआ था। कोरोना की स्थिति में सुधार आने के साथ सामान्य कारोबारी गतिविधियां शुरु होने और दुनिया के तमाम देशों द्वारा लॉकडाउन हटने के साथ ही सोने की कीमतों में गिरावट आती दिखी। स्थितियों में सुधार के साथ ही सोने से निकलकर पैसे का फ्लो इक्विटी में जाता दिखा। जिसकी वजह से सोने की कीमतों पर दबाव आया है।

उन्होंने आगे कहा कि निम्न ब्याज दर के दौर में सोना आर्कषक निवेश विकल्प बन जाता है। अब जैसे - जैसे ब्याज दरों में बढ़ोतरी नजर आएगी। वैसे-वैसे सोने पर दबाव बढ़ता नजर आएगा। 2022 मे सोने की दशा और दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि ब्याज दरों की स्थिति क्या रहती है। महंगाई किस स्तर पर रहती है और कोरोना के नए वैरिएंट से निपटने के लिए दुनिया की सरकारें कितनी कामयाब रहती है।

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