भारत सरकार ने सोने (Gold) और कुछ खाद्य तेल (Edible Oil) की बेस इंपोर्ट प्राइस में कमी की है। सरकार हर 15 दिन खाद्य तेलों, सोने और चांदी के बेस इंपोर्ट प्राइस में बदलाव करती है। इन कीमतों के जरिए ये पता लगाया जाता है कि इंपोर्टर को अब कितना टैक्स देना होगा।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक है। जबकि अपनी ज्यादातर घरेलू सोने की जरूरत को इंपोर्ट के जरिए पूरा करता है।
सोने और चांदी को छोड़कर सभी कमोडिटी का बेस प्राइस डॉलर प्रति टन में है। सोने का टैरिफ डॉलर प्रति 10 ग्राम में है।
सोने पर बेस टैरिफ वैल्यू को घटाकर 549 डॉलर प्रति 10 ग्राम कर दिया गया है, जो पहले 557 डॉलर प्रति 10 ग्राम था।
सोना एक अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी है और इसकी कीमत अमेरिकी डॉलर में है। इसलिए, भारत में पीले धातु की कीमतों में उतार-चढ़ाव ग्रीनबैक और इंपोर्ट ड्यूटी से नजदीक से जुड़ा हुआ है।
जुलाई में, सरकार ने सोने पर अपनी बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी 7.5% से बढ़ाकर 12.5% कर दी थी। इससे घरेलू कीमतों के मुकाबले ग्लोबल रेट में तेज उछाल आया था। भारत अपनी जरूरत का ज्यादतर सोना इंपोर्ट करता है।
भारत में सोने की कीमतें 6 महीने के निचले स्तर के करीब रहीं, क्योंकि MCX फ्यूचर 0.16% गिरकर, 49,231 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। सोना इस हफ्ते अब तक सोमवार के उच्च स्तर से लगभग 1,500 रुपए नीचे है।
वैश्विक बाजारों में, अमेरिकी डॉलर में तेजी और अमेरिकी रेट में बढ़ोतरी की संभावनाओं के बीच पीला धातु दो साल के निचले स्तर के करीब संघर्ष कर रहा था। स्पॉट गोल्ड 1,664.48 डॉलर प्रति औंस था और इस हफ्ते अब तक 3% गिर चुका है।
Mint के मुताबिक, IIFL सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट- रिसर्च, अनुज गुप्ता, ने कहा, " आने वाले त्योहारी सीजन में सोने और खाद्य तेल की मांग बढ़ने की उम्मीद है। कीमती धातु और खाने के तेल की मांग बढ़ने के कारण भारत को सामान्य दिनों की तुलना में इन चीजों का ज्यादा इंपोर्ट करना होगा।"
उन्होंने कहा, "इसलिए, सोने और कुछ खाद्य तेलों के बेस इंपोर्ट प्राइस में कटौती करने के भारत सरकार के कदम का मकसद इन वस्तुओं के घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देना है।"