अब पेट्रोल के निर्यात पर ₹3 की स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी, डीजल और ATF के लिए दर घटी

Special Additional Excise Duty: पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस शून्य होगा। घरेलू खपत के लिए इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी को विंडफॉल गेन्स टैक्स भी कहते हैं

अपडेटेड May 16, 2026 पर 7:56 AM
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डीजल पर SAED को 23 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

भारत सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर की स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) लगा दी है। पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते पैदा हुए एनर्जी संकट के बीच यह फैसला शुक्रवार, 15 मई को लिया गया। दूसरी ओर डीजल पर SAED को 23 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी इस ड्यूटी को 33 रुपये से घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। ये बदलाव 16 मई से लागू हो रहे हैं।

एक नोटिफिकेशन में वित्त मंत्रालय ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (Cess) शून्य होगा। घरेलू खपत के लिए इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पश्चिम एशिया संकट की शुरुआत के बाद से पेट्रोल पर SAED पहली बार लगाई गई  है।

मार्च और अप्रैल में कितनी रखी गई थी दर


निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी को विंडफॉल गेन्स टैक्स भी कहते हैं। सरकार ने 26 मार्च 2026 को डीजल पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 29.5 रुपये प्रति लीटर की SAED लगाई थी। 11 अप्रैल को हुए रिव्यू में इस ड्यूटी को डीजल के के लिए बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर और ATF के लिए 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया। उसके बाद 30 अप्रैल के रिव्यू में इन्हें घटाकर क्रमश: 23 रुपये प्रति लीटर और 33 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया।

109 डॉलर के पार है कच्चा तेल

पश्चिम एशिया संकट के बीच ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत 109.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते ईरान ने महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को कंट्रोल कर व्यावसायिक जहाजों का यातायात लगभग रुकवा दिया है। इस रुकावट से एनर्जी संकट खड़ा हो गया है, जो गंभीर रूप लेता जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और वैश्विक बाजार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की कुल जरूरत का 88 प्रतिशत ​आयात के जरिए पूरा करता है। ज्यादातर इंपोर्ट महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होता है।

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