डिस्काउंट कम होने के बाद भारत में रूस से कच्चे तेल के इंपोर्ट में भारी गिरावट

नवंबर में रूस से भारत का कच्चे तेल का इंपोर्ट गिरकर जून 2022 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। एक यूरोपीय थिंक टैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि क्रेमलिन अभी भी भारत के लिए ऑयल का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हुए हमले के बाद भारत, रूस के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था। भारत में तेल के कुल इंपोर्ट में रूस की हिस्सेदारी 1 पर्सेंट भी कम थी, जो अब बढ़कर तकरीबन 40 पर्सेंट हो गई है

अपडेटेड Dec 15, 2024 पर 3:10 PM
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ईराक और सऊदी अरब के बाद रूस भारत का टॉप ऑयल सप्लायर बना हुआ है।

नवंबर में रूस से भारत का कच्चे तेल का इंपोर्ट गिरकर जून 2022 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। एक यूरोपीय थिंक टैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि क्रेमलिन अभी भी भारत के लिए ऑयल का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हुए हमले के बाद भारत, रूस के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था। भारत में तेल के कुल इंपोर्ट में रूस की हिस्सेदारी 1 पर्सेंट भी कम थी, जो अब बढ़कर तकरीबन 40 पर्सेंट हो गई है।

रूस से तेल की खरीद में बढ़ोतरी की मुख्य वजह इसका दुनिया के बाकी देशों की ऑयल प्राइस के मुकाबले सस्ता होना है। दरअसल, कई यूरोपीय देशों ने मॉस्को से तेल खरीदना बंद कर दिया था। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है, ' नवंबर के दौरान भारत में रूस के कच्चे तेल के इंपोर्ट में 55 पर्सेंट की गिरावट रही, जो जून 2022 के बाद सबसे कम है।'

ईराक और सऊदी अरब के बाद रूस भारत का टॉप ऑयल सप्लायर बना हुआ है। CREA ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, 'चीन ने रूस के कच्चे तेल में एक्सपोर्ट का 47 हिस्सा खरीदा है, जबकि भारत की हिस्सेदारी 37 पर्सेंट। रूस के कच्चे तेल के एक्सपोर्ट में यूरोपियन यूनियन और तुर्की की हिस्सेदारी 6-6 पर्सेंट है।' हालांकि, रिपोर्ट में एक्सपोर्ट के सटीक आंकड़ों का जिक्र नहीं है।

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