भारत 2026 से रसोई गैस का 10% हिस्सा अमेरिका से इंपोर्ट करेगा, जानिए कीमतों पर क्या होगा असर

भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील में भी ऊर्जा आयात एक बड़ा मुद्दा है। भारत चाहता है कि अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों पर आयात शुल्क कम किया जाए, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती गैस मिल सके और दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन बेहतर हो

अपडेटेड Jul 08, 2025 पर 4:29 PM
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कुकिंग गैस को लेकर क्या है सरकार का प्लान, क्या इससे कीमतों पर असर होगा!

भारत अब अपने कुकिंग गैस के कुल इंपोर्ट का करीब 10% हिस्सा अमेरिका से खरीदने का प्लान बना रहा है। भारत 2026 से अमेरिका से कुकिंग गैस इंपोर्ट करेगा। भारत सरकार का मकसद इसके जरिए अमेरिका के साथ व्यापार घाटा कम करने का है। अभी भारत अपनी 90% से ज्यादा एलपीजी (LPG) जरूरतें मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) देशों से पूरी करता है। एलपीजी यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस, जिसमें प्रोपेन और ब्यूटेन गैस होती है, भारत में मुख्य रूप से खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होती है और इसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां आयात करती हैं और सब्सिडी पर बेचती हैं।

अब तक भारत ने अमेरिका से LPG बहुत कम खरीदी थी, क्योंकि वहां से माल लाने में भाड़ा ज्यादा लगता था। लेकिन हाल ही में चीन ने अमेरिकी प्रोपेन पर आयात शुल्क बढ़ा दिया, जिससे भारत को सस्ता LPG मिलना शुरू हुआ है। भारत सरकार अब अमेरिकी प्रोपेन और ब्यूटेन पर आयात शुल्क हटाने की भी तैयारी कर रही है। इससे LPG और पेट्रोकेमिकल्स की कीमतों में राहत मिल सकती है।

भारत ने अमेरिका से ऊर्जा खरीद को अगले कुछ सालों में 10 अरब डॉलर से बढ़ाकर 25 अरब डॉलर करने का वादा किया है। दोनों देशों ने 2030 तक आपसी व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा है। भारत ने इस साल अमेरिकी कच्चे तेल का आयात भी दोगुना कर दिया है।


ऊर्जा सेक्टर के जानकारों का कहना है कि भारत को LPG के लिए नए स्रोतों की जरूरत है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके। अभी भारत ज्यादातर LPG फ्री-ऑन-बोर्ड (FOB) आधार पर मिडिल ईस्ट से खरीदता है। लेकिन अब अमेरिकी LPG की डिलीवरी सीधे भारत तक कराई जा सकती है, जिससे मालभाड़ा और सप्लाई रिस्क कम होगा।

भारत में हर साल LPG की मांग 5-6% की दर से बढ़ रही है। 2026 तक भारत का LPG आयात 22 से 23 मिलियन टन तक पहुंच सकता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, 2024 से 2030 के बीच भारत की LPG मांग औसतन 2.5% सालाना बढ़ेगी और 2030 तक यह 37.7 मिलियन टन तक पहुंच सकती है।

अमेरिका से LPG आयात बढ़ाने के पीछे एक और वजह यह है कि चीन ने अमेरिकी प्रोपेन पर 10% आयात शुल्क लगा दिया है, जिससे भारत के लिए अमेरिकी LPG सस्ती और उपलब्ध हो गई है। भारत के ऊर्जा मंत्रालय और सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि अंतिम फैसला कीमतों और सप्लाई की स्थिरता पर निर्भर करेगा।

भारत ने हाल ही में LNG (तरल प्राकृतिक गैस) के आयात में भी तेजी दिखाई है और 2024 में अमेरिका से LNG आयात 71% से ज्यादा बढ़ गया है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक देश की ऊर्जा जरूरतों में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 15% तक पहुंच जाए।

 

इस तरह, भारत की यह रणनीति न सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि अमेरिका के साथ आर्थिक रिश्तों को भी नई ऊंचाई देगी।

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