भारतीय कंपनियों का $7 बिलियन पहुंचा NDF कारोबार, RBI की सख्ती से बैंकों में मची अफरातफरी का उठाया फायदा

NDF Surge: 27 मार्च को RBI ने बैंकों की विदेशी मुद्रा रखने की सीमा पर पाबंदी लगा दी थी। इस नियम के बाद बैंकों को अपनी पुरानी पोजीशन खत्म करनी पड़ी। बैंक घरेलू बाजार में डॉलर बेच रहे थे और साथ ही NDF मार्केट में डॉलर खरीद रहे थे। बैंकों की इस अफरा-तफरी से घरेलू बाजार और NDF बाजार के बीच डॉलर की कीमतों में अंतर बढ़ गया

अपडेटेड Apr 06, 2026 पर 6:57 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
कंपनियों ने घरेलू बाजार से सस्ता डॉलर खरीदा और उसे NDF मार्केट में ऊंचे दाम पर बेच दिया

Non-Deliverable Forwards: भारतीय कंपनियों ने हाल ही में फॉरेक्स मार्केट में एक बड़ा दांव खेला है। 30 मार्च को नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) मार्केट में कंपनियों का कारोबार बढ़कर 7 अरब डॉलर से अधिक हो गया, जो औसत कारोबार से लगभग सात गुना ज्यादा है। यह उछाल तब आया जब कंपनियों ने रिजर्व बैंक की सख्ती के बाद बैंकों द्वारा खाली किए गए मुनाफे के मौके को लपक लिया।

क्यों बढ़ी NDF में हलचल?

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों पर लगाए गए प्रतिबंधों से हुई। दरअसल 27 मार्च को RBI ने बैंकों की 'नेट ऑनशोर ओपन फॉरेक्स पोजीशन' यानी विदेशी मुद्रा रखने की सीमा पर पाबंदी लगा दी थी। इस नियम के बाद बैंकों को अपनी पुरानी पोजीशन खत्म करनी पड़ी। बैंक घरेलू बाजार में डॉलर बेच रहे थे और साथ ही NDF मार्केट में डॉलर खरीद रहे थे। बैंकों की इस अफरा-तफरी से घरेलू बाजार और NDF बाजार के बीच डॉलर की कीमतों में अंतर बढ़ गया। कंपनियों ने इसी अंतर का फायदा उठाते हुए घरेलू बाजार से सस्ता डॉलर खरीदा और उसे NDF मार्केट में ऊंचे दाम पर बेच दिया।


आंकड़ों में समझें कंपनियों का 'डॉलर गेम'

क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCIL) के आंकड़ों से पता चलता है कि 30 मार्च को कंपनियों ने किस कदर बाजार पर कब्जा किया। NDF मार्केट में क्लाइंट ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़कर $7.54 बिलियन पहुंच गया। इसमें से $7.51 बिलियन की तो केवल कंपनियों द्वारा डॉलर की बिकवाली थी, जबकि खरीद मात्र $24 मिलियन रही। इससे शुरुआत में रुपये में थोड़ी मजबूती दिखी, लेकिन कंपनियों द्वारा घरेलू बाजार में डॉलर की भारी मांग के कारण रुपया गिरकर 95 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था।

RBI ने लिया कड़ा एक्शन

जब रिजर्व बैंक ने देखा कि कंपनियां इस 'आर्बिट्राज' के जरिए रुपये पर दबाव बना रही हैं, तो उसने नियमों को और सख्त कर दिया। स्थानीय बैंकों को अब ग्राहकों को NDF की सुविधा देने से मना कर दिया गया है। वहीं कंपनियों को अब रद्द किए गए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को फिर से बुक करने की अनुमति नहीं है। RBI के इन कड़े कदमों और कंपनियों की गतिविधियों पर लगाम लगाने के बाद रुपये को सहारा मिला है। फिलहाल रुपया 93 प्रति डॉलर के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।