LPG Price 10 September 2026: देश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए 10 सितंबर 2026 को राहत की खबर है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं, महीने की शुरुआत में तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में करीब 9.50 रुपये से 11.50 रुपये तक की बढ़ोतरी की थी।
घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट में आखिरी बार 7 जून 2026 को बदलाव हुआ था। इसके बाद से घरेलू गैस की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
दिल्ली से पटना तक, जानें आज का LPG रेट
अलग-अलग शहरों में घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतें अलग हैं। 10 सितंबर को प्रमुख शहरों में 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर के दाम इस प्रकार हैं:
उज्ज्वला योजना के बावजूद LPG का इस्तेमाल पूरी तरह क्यों नहीं?
घरेलू गैस की कीमतों के बीच अब एक दूसरी तस्वीर भी सामने आई है। Council on Energy, Environment and Water यानी CEEW की एक स्टडी के मुताबिक, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों परिवारों तक LPG कनेक्शन पहुंचने के बावजूद ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में परिवार खाना पकाने के लिए पारंपरिक ईंधन का सहारा ले रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, PMUY के तहत 10.5 करोड़ से ज्यादा मुफ्त LPG कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद सिर्फ 23 फीसदी ग्रामीण परिवार ही खाना पकाने के लिए पूरी तरह LPG पर निर्भर हैं। बाकी परिवार LPG के साथ लकड़ी जैसे पारंपरिक ईंधन का भी इस्तेमाल करते हैं।
ग्रामीण परिवारों में लकड़ी का इस्तेमाल अब भी ज्यादा
CEEW का यह सर्वे असम, झारखंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के 2,222 ग्रामीण परिवारों के बीच नवंबर 2024 से जनवरी 2025 के दौरान किया गया था।
अध्ययन में सामने आया कि करीब 48 फीसदी परिवार खाना पकाने के लिए LPG को मुख्य ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। वहीं, लगभग 50 फीसदी परिवारों की मुख्य निर्भरता लकड़ी पर बनी हुई है।
साल में 7-8 सिलेंडर चाहिए, लेकिन रिफिल हो रहे सिर्फ 4.8
रिपोर्ट का एक अहम पहलू LPG रिफिल को लेकर भी है। पूरी तरह LPG पर निर्भर परिवार को सालभर में अनुमानतः 7 से 8 सिलेंडर की जरूरत पड़ सकती है। इसके मुकाबले उज्ज्वला योजना के लाभार्थी औसतन एक साल में करीब 4.8 सिलेंडर ही रिफिल करवा पा रहे हैं।
इससे संकेत मिलता है कि सिर्फ LPG कनेक्शन उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं है। नियमित रिफिल की लागत भी ग्रामीण परिवारों के लिए एक अहम चुनौती बनी हुई है। यही वजह है कि कई परिवार गैस के साथ लकड़ी जैसे पारंपरिक ईंधन का इस्तेमाल जारी रखते हैं।