Crude Oil की कीमतों में शुक्रवार को लगतार तीसरे दिन उछाल आया। इसकी वजह आने वाले दिनों में क्रूड की मांग बढ़ने की उम्मीद है। अमेरिका में क्रूड के स्टॉक में अनुमान से ज्यादा गिरावट आई है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी आने की चिंता घटी है। अगर मंदी नहीं आई तो क्रूड की मांग बढ़ेगी।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (Brent Crude Futures) 7 सेंट यानी 0.1 फीसदी चढ़कर 96.66 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। गुरुवार को यह 3.1 फीसदी चढ़कर बंद हुआ था। यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडियट क्रूड 0.2 फीसदी की मजबूती के साथ 90.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। गुरुवार को इसमें 2.7 फीसदी मजबूती आई थी।
Rakuten Securities के कमोडिटी एनालिस्ट Satoru Yoshida ने कहा कि अमेरिका में वीकली डेटा अच्छे आने का असर क्रूड की कीमतों पर पड़ा है। इससे आने वाले समय में क्रूड ऑयल की डिमांड बढ़ने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि मंदी की चिंता और OPEC+ देशों की तरफ से उत्पादन बढ़ाए जाने की उम्मीद से कीमतें बहुत ऊपर नहीं जाएंगी।
हाल के हफ्तों में रोजाना 50 लाख बैरल के निर्यात से अमेरिका में क्रूड ऑयल के स्टॉक में तेज गिरावट आई है। अमेरिकी कंपनियां यूरोपीय देशों को क्रूड ऑयल का निर्यात कर रही हैं। इसकी वजह यह है कि रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से यूरोपीय देश रूस से क्रूड नहीं खरीद रहे हैं।
12 अगस्त को खत्म हफ्ते में अमेरिका में क्रूड का स्टॉक 71 लाख बैरल घट गया। एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के डेटा से यह जानकारी मिली है। यह अमेरिकी क्रूड के स्टॉक में अनुमान से ज्यादा कमी है। अनुमान 2.75 लाख बैरल की कमी का था।
क्रूड ऑयव के स्टॉक में ज्यादा कमी आने के बाद अमेरिकी में ऑयल कंपनियों ने अपनी पूरी क्षमता के साथ उत्पादन करने का प्लान बनाया है। मंदी को लेकर कंपनियों की चिंता में भी कमी आई है। इसलिए वे बढ़ती डिमांड पूरी करने के लिए उत्पादन बढ़ाना चाहती हैं।
OPEC ने नए जनरल सेक्रेटरी Haitham Al Ghais ने रायटर्स को बताया कि एनर्जी की ऊंची कीमतों के लिए पॉलिसी मेकर्स और लॉ मेकर्स जिम्मेदार है। उन्होंने ऑयल एंड गैस सेक्टर में पर्याप्त निवेश नहीं किया। इस वजह से क्रूड की कीमतों में उछाल आ रहा है।